Ranchi: झारखंड की सत्ता के गलियारों में इस वक्त कानूनी राहत से ज्यादा राजनीतिक आफत की चर्चा है. पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को जमानत मिलने की खबर ने राज्य के सियासी पारे को अचानक उबाल पर ला दिया है. आलमगीर आलम की जेल से घर वापसी की सुगबुगाहट ने न केवल कांग्रेस के भीतर शक्ति संतुलन को चुनौती दी है, बल्कि विपक्षी खेमे को भी चुटकी लेने का सुनहरा मौका दे दिया है.
भानु प्रताप शाही का तंज: कुर्सी जाने के डर से बिगड़ी तबीयत
पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही ने इस पूरे घटनाक्रम पर सोशल मीडिया के तंज कसते हुए कहा कि आलमगीर आलम को जमानत मिलने की खबर सुनते ही स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी बेहोश हो गए हैं. उन्हें डर सता रहा है कि कहीं उनकी कुर्सी न चली जाए और इसी चिंता में उनकी तबीयत खराब हो गई है.

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क्यों फंसी है इरफान अंसारी की साख?
झारखंड की राजनीति में मुस्लिम समुदाय कांग्रेस का कोर वोट बैंक माना जाता है. सत्ता के समीकरण को साधने के लिए इस समुदाय से एक मंत्री का होना अनिवार्य है. पिछली बार कांग्रेस कोटे से आलमगीर आलम को कैबिनेट में जगह मिली थी. आलमगीर आलम के जेल जाने के बाद, पार्टी ने जातीय और धार्मिक संतुलन बनाए रखने के लिए इरफान अंसारी को मंत्री पद की शपथ दिलाई थी. अब जबकि आलमगीर आलम बाहर आ रहे हैं, तो चर्चा आम है कि क्या कांग्रेस अपने पुराने और कद्दावर नेता को फिर से वही रसूख देगी? यदि ऐसा होता है, तो इरफान अंसारी के राजनीतिक भविष्य और उनकी कैबिनेट सीट पर तलवार लटक सकती है.
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