प्रकृति और आस्था का संगम, विद्या के मंदिर में दिखा ‘विघ्नहर्ता’ का स्वरूप

Palamu : यह केवल एक आकृति नहीं, बल्कि उस संस्थान के संस्कारों का प्रतिबिंब है, ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रकृति ने...

Palamu : यह केवल एक आकृति नहीं, बल्कि उस संस्थान के संस्कारों का प्रतिबिंब है, ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रकृति ने स्वयं ज्ञान के इस मंदिर को अपना आशीर्वाद दिया है, पलामू जिले के नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय और जी.एल.ए. कॉलेज के प्रांगण में साक्षात ‘विघ्नहर्ता’ (भगवान गणेश) की छवि को पाकर सभी लोग स्वयं को धन्य महसूस कर रहे हैं. ​यह विश्वास किया जा रहा है कि बुद्धि और विवेक के देवता का यह दिव्य प्राकट्य गणेश लाल अग्रवाल कॉलेज और विश्वविद्यालय के हर विघ्न को दूर करेगा और हमारे शैक्षणिक सफर को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, जहाँ आस्था और शिक्षा का ऐसा दिव्य मिलन हो, वहाँ सफलता स्वयं मार्ग प्रशस्त करती है, ईश्वर सभी छात्रों को उत्कृष्टता की ओर ले जाएं.

​समाज और धर्म के प्रति एक संदेश

​समाज में इस तरह की प्राकृतिक आकृतियों को अक्सर ‘आस्था’ और ‘प्रकृति’ के अनोखे तालमेल के रूप में देखा जाता है, तार्किक रूप से यह प्रकृति की एक अद्भुत कलाकृति हो सकती है, लेकिन एक विद्यार्थी और समाज के लिए इसके गहरे मायने है ​ऐसी आकृतियाँ हमें याद दिलाती हैं कि ईश्वर और सकारात्मक ऊर्जा हर कण में व्याप्त है, जो हमें कठिन समय में धैर्य देती है, ​यह दर्शाता है कि प्रकृति स्वयं सबसे बड़ी शिल्पकार है, हमें पर्यावरण का सम्मान करना चाहिए क्योंकि वह हमें बिना मांगे बहुत कुछ देती है,​ जब शिक्षा के मंदिर में ऐसी दिव्य छवि दिखती है, तो यह छात्रों के भीतर अनुशासन, नैतिकता और ज्ञान के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करती है.

Also Read : हाईकोर्ट ने पेसा नियमावली मामले में सरकार को दिया जवाब दाखिल करने का निर्देश

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *