Hazaribagh: कुसुम्भा गांव में मासूम बच्ची की निर्मम हत्या के सनसनीखेज मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है. इसी कड़ी में गुरुवार को राष्ट्रीय महिला आयोग की तीन सदस्यीय टीम गांव पहुंची और पूरे मामले की जमीनी हकीकत का जायजा लिया. टीम ने घटना से जुड़े हर पहलू की गंभीरता से जांच करते हुए परिजनों से विस्तृत पूछताछ की.
तीन सदस्यीय टीम ने की जांच
महिला आयोग की टीम में पूर्व सदस्य ममता कुमारी, विधि अधिकारी मनमोहन वर्मा तथा सीनियर कोऑर्डिनेटर कंचन खट्टर शामिल थे. टीम सबसे पहले मृत बच्ची की मां सह मुख्य आरोपी रेशमी देवी के घर पहुंची, जहां परिजनों से घटना के संबंध में विस्तृत जानकारी ली गई.
आरोपी के घर और पूजा स्थल का निरीक्षण
इसके बाद टीम आरोपी शांति देवी उर्फ भगतिनी के घर भी पहुंची और वहां स्थित पूजा स्थल का निरीक्षण किया. जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि शांति देवी झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र के जरिए अपना जीवन यापन करती थी. पारिवारिक स्थिति भी बेहद दयनीय बताई गई—पति और पुत्र की पहले ही मृत्यु हो चुकी है, जबकि पुत्रवधू अपने तीन बच्चों को छोड़कर दूसरी शादी कर चुकी है.
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बेसहारा बच्चों की स्थिति पर जताई चिंता
महिला आयोग की टीम ने इन बच्चों से भी मुलाकात कर उनकी स्थिति को समझा. दादी के जेल जाने के बाद ये बच्चे पूरी तरह बेसहारा हो गए हैं. टीम ने इस पर गंभीर चिंता जताते हुए प्रशासन को बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा और सुरक्षा की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया.
प्रशासन को दिए सख्त निर्देश
इसके साथ ही महिला आयोग ने प्रखंड प्रशासन को पीड़ित परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ तत्काल उपलब्ध कराने, सामाजिक सुरक्षा देने और हर संभव सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.
न्याय और पुनर्वास की उम्मीद जगी
टीम की इस पहल को लेकर स्थानीय स्तर पर उम्मीद जगी है कि अब न केवल इस जघन्य अपराध में न्याय सुनिश्चित होगा, बल्कि प्रभावित परिवारों और बच्चों के पुनर्वास की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाएंगे.
