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यश राज पांडेय ने बढ़ाया बोकारो का मान, भारतीय सेना में बने लेफ्टिनेंट, कॉर्प्स ऑफ सिग्नल्स में मिली तैनाती

Bermo: बोकारो थर्मल के लिए बेहद गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण सामने आया है, जहां गोविंदपुर डी पंचायत के जनता नगर निवासी यश...

Bokaro Thermal
लेफ्टिनेंट यश अपने माता-पिता एवं भाई के साथ

Bermo: बोकारो थर्मल के लिए बेहद गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण सामने आया है, जहां गोविंदपुर डी पंचायत के जनता नगर निवासी यश राज पांडेय ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर पूरे बोकारो जिले का नाम देश पटल पर रोशन किया है. मेधावी और अनुशासित पृष्ठभूमि से आने वाले लेफ्टिनेंट यश राज पांडेय को सेना के प्रतिष्ठित कॉर्प्स ऑफ सिग्नल्स में बतौर सिग्नल्स ऑफिसर देश सेवा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है. बचपन से ही देश सेवा का अटूट संकल्प मन में संजोए रखने वाले यश राज पांडेय की इस ऐतिहासिक सफलता से पूरे क्षेत्र में हर्ष का माहौल है और बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है.

भारतीय सेना का हिस्सा बनना था यश का सपना

गोमिया के पिट्स माॅडर्न स्कूल की शिक्षिका माता चंदा कुमारी पांडेय एवं पिता प्रवीण कुमार पांडेय के पुत्र तथा दादाजी शोभ नाथ पांडेय एवं दादी कृष्णा देवी के पौत्र यश राज पांडेय शुरू से ही कुशाग्र बुद्धि के रहे हैं. उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा डीएवी स्वांग से पूरी की, जहां 10वीं की परीक्षा में उन्होंने 98.6 प्रतिशत अंक हासिल किए. इसके बाद पिट्स मॉडर्न स्कूल, गोमिया से विज्ञान संकाय में 12वीं की पढ़ाई करते हुए उन्होंने 96.7 प्रतिशत अंक लाकर अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता को साबित किया. यश ने अपने जीवन का लक्ष्य बचपन में ही तय कर लिया था और उनका एकमात्र सपना नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) की परीक्षा पास कर भारतीय सेना का हिस्सा बनना था. उनके इस संकल्प को परिवार में भी मजबूत आधार मिला, क्योंकि उनके बड़े चाचा प्रमोद कुमार पांडेय खुद सेना में सूबेदार के पद पर कार्यरत हैं और रक्षा सेवा में सक्रिय हैं.

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पहले प्रयास में एनडीए की कठिन परीक्षा उत्तीर्ण कर रचा इतिहास

अपने सपने को साकार करने के लिए यश ने साल 2022 में अपने पहले ही प्रयास में प्रतिष्ठित एनडीए की कठिन परीक्षा उत्तीर्ण कर इतिहास रच दिया. इसके बाद यश राज पांडेय ने एनडीए के 147वें बैच के तहत खड़कवासला, पुणे (महाराष्ट्र) में तीन साल की बेहद कड़े और अनुशासित सैन्य प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा किया. इसके बाद वे इंडियन मिलिट्री एकेडमी (आईएमए), देहरादून (उत्तराखंड) के 158वें बैच का हिस्सा बने, जहां एक साल की उच्च स्तरीय और कठिन ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वे भारतीय सेना में बतौर लेफ्टिनेंट (लेफ्टिनेंट यश राज पांडेय) कमीशन हुए. अपनी इस शानदार और असाधारण सफलता का पूरा श्रेय वे अपनी शिक्षिका माता चंदा कुमारी पांडेय और पिता प्रवीण कुमार पांडेय के कुशल मार्गदर्शन, त्याग और संबल को देते हैं. बोकारो थर्मल के एक साधारण परिवार से निकलकर देश की सीमाओं की रक्षा के लिए सैन्य अधिकारी बनने के उनके इस सफर ने स्थानीय युवाओं के लिए प्रेरणा का एक नया अध्याय लिख दिया है.

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