Hazaribagh: खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए बनाए गए जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट के करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद हजारीबाग जिले के कई इलाकों में आज भी सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है. इसी मुद्दे को लेकर झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी पार्टी ने मोर्चा खोलते हुए जनआंदोलन की चेतावनी दी है.
आठ वर्षों में 734 करोड़ रुपये मिले, फिर भी हालात जस के तस
पार्टी के जिला मीडिया प्रभारी पंकज कुमार पटेल ने कहा कि पिछले आठ वर्षों में हजारीबाग जिले को लगभग 734 करोड़ रुपये का DMFT फंड प्राप्त हुआ, लेकिन धरातल पर विकास की तस्वीर अपेक्षित रूप से नहीं बदल सकी. खनन प्रभावित क्षेत्रों के लिए आवंटित इस राशि का उद्देश्य स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना था, मगर आज भी कई गांव मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

कटकमसांडी में सड़क, स्वास्थ्य और पेयजल की समस्या बरकरार
उन्होंने विशेष रूप से कटकमसांडी प्रखंड का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां अनेक गांवों में सड़कें जर्जर हैं, स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अभाव है और स्वच्छ पेयजल की समस्या बनी हुई है. ऐसे में आम जनता के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि जब विकास के लिए इतनी बड़ी राशि उपलब्ध हुई, तो उसका प्रभाव जमीन पर क्यों नहीं दिखाई दे रहा.
फंड के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग
झालोक्राप ने DMFT फंड के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करते हुए कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि उनके क्षेत्र के विकास के लिए प्राप्त धनराशि किन योजनाओं पर खर्च की गई और उन योजनाओं का वास्तविक लाभ किसे मिला. पार्टी ने सभी विकास कार्यों और खर्च का सार्वजनिक लेखा-जोखा जारी करने की मांग की है.
जनता से एकजुट होने की अपील
पंकज कुमार पटेल ने कहा कि यदि जनता अपने अधिकारों और क्षेत्रीय विकास के मुद्दों पर संगठित नहीं होगी तो उपेक्षा का सिलसिला जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि लोग लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करें और यह सुनिश्चित करें कि जनता के नाम पर मिलने वाला प्रत्येक रुपया जनहित और विकास कार्यों पर ही खर्च हो.
गांव-गांव जनजागरण अभियान चलाएगी पार्टी
पार्टी ने घोषणा की है कि आने वाले दिनों में गांव-गांव जाकर जनजागरण अभियान चलाया जाएगा. यदि DMFT फंड के उपयोग को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा. झालोक्राप का कहना है कि “कटकमसांडी अब उपेक्षा नहीं, विकास चाहता है.” क्षेत्र की जनता विकास कार्यों का हिसाब मांगने के लिए तैयार है और पारदर्शिता के सवाल पर व्यापक जनसमर्थन जुटाया जाएगा. जिले में DMFT फंड की बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद विकास की धीमी रफ्तार पर उठ रहे सवाल अब राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बनते जा रहे हैं. ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और संबंधित विभाग जनता के इन सवालों का जवाब किस तरह देते हैं.


