Ranchi: राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (सिया) ने अब तक झारखंड की 25 बड़ी विकास और खनन परियोजनाओं को अंतिम रूप से पर्यावरण मंजूरी दे दी है. इस बड़े फैसले के बाद राज्य के खनिज संपदा सेक्टर, रियल एस्टेट, बुनियादी ढांचा निर्माण और भारी उद्योगों के विस्तार का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है. स्वीकृत किए गए प्रस्तावों में देश की महारत्न और नवरत्न कंपनियों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की कई बड़ी परियोजनाएं शामिल हैं, जो झारखंड के आर्थिक परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखती हैं.
सीसीएल और सेल के मेगा प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी
झारखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले कोयला खनन क्षेत्र को इस फैसले से सबसे बड़ी मजबूती मिली है. ऊर्जा सुरक्षा और देश के विभिन्न उद्योगों में कोयले की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) और स्टील ऑथोरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की तीन सबसे बड़ी परियोजनाओं को पर्यावरण मंजूरी मिल गई है. इसमें सबसे प्रमुख नाम गिरिडीह ओसीपी का है. सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड के इस बेहद महत्वाकांक्षी ओपनकास्ट प्रोजेक्ट को तकनीकी मूल्यांकन के बाद अंतिम मंजूरी दी गई. इसके साथ ही सीसीएल की एक और महत्वपूर्ण परियोजना कबरीबाद ओसीपी को भी खनन कार्य को आगे बढ़ाने के लिए हरी झंडी दे दी गई है, जो गिरिडीह जिले के औद्योगिक विकास के लिए संजीवनी साबित होगी.
कोयलांचल में भी कई कोल कंपनियों को मिली मंजूरी
कोयला क्षेत्र में दूसरी सबसे बड़ी सफलता धनबाद जिले के झरिया-सह-जोरापोखर-सह-सिंदरी क्षेत्र को मिली है. यहां स्थित जीतपुर अंडरग्राउंड माइन को पर्यावरण मंजूरी मिल गई है. यह खदान स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड के कोलियरीज डिवीजन के अंतर्गत आती है. इस भूमिगत खदान के चालू होने से देश के इस्पात कारखानों को उच्च गुणवत्ता वाले कोकिंग कोल की आपूर्ति तेज हो सकेगी, जिससे विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी.
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पाकुड़ और साहिबगंज में स्टोन माइनिंग को रफ्तार
राज्य में सड़क निर्माण, पुल-पुलिया और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए सबसे जरूरी चीज स्टोन चिप्स (पत्थर) की उपलब्धता है. इस सूची में संताल परगना क्षेत्र, विशेषकर पाकुड़ और साहिबगंज जिलों में पत्थर खनन से जुड़े एक दर्जन से अधिक बड़े प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई है.पाकुड़ जिले के अलग-अलग ब्लॉकों और तहसीलों में बड़े पैमाने पर स्टोन डिपॉजिट्स को मंजूरी दी गई है. इनमें बिशनपुर स्टोन डिपॉजिट के लिए भवेश तनवानी और पवन कुमार तनवानी को अलग-अलग प्रोजेक्ट्स के लिए मंजूरी मिली है. इसी क्षेत्र में भुस्का स्टोन डिपॉजिट के लिए पीयूष तनवानी तथा पाकुरिया तहसील के खगाचुआ स्टोन डिपॉजिट के लिए मैसर्स एसई. स्टोन वर्क्स को खनन की अनुमति दे दी गई है. हिरणपुर और पाकुर तहसील में भी कई परियोजनाओं को एक साथ हरी झंडी दिखाई गई है.इनमें बिशनपुर स्टोन डिपॉजिट माइनिंग प्रोजेक्ट के लिए मैसर्स दादा भाई स्टोन वर्क्स, मुर्गाडांगा स्टोन डिपॉजिट प्रोजेक्ट (दो अलग-अलग क्षेत्र) के लिए मैसर्स साई कंस्ट्रक्शन और मैसर्स श्री गणेश स्टोन वर्क्स को स्वीकृति मिली है. इसके अतिरिक्त बसमाता स्टोन माइनिंग प्रोजेक्ट के लिए मैसर्स न्यू मुस्कान स्टोन वर्क्स व मैसर्स हीना स्टोन वर्क्स और महेशपुर तहसील में जियापानी स्टोन डिपॉजिट के लिए मैसर्स श्री हरिओम स्टोन वर्क्स को पर्यावरण क्लीयरेंस दे दिया गया है. बरहरवा क्षेत्र में झारखंड राज्य खनिज विकास निगम लिमिटेड के स्वामित्व वाले चंदुला – सिमलगोड़ा ओपेनकास्ट स्टोन माइन को भी मंजूरी मिल गई है.
रांची के कांके और अंगड़ा में ईंट मिट्टी खनन की अनुमति
राजधानी रांची और इसके आस-पास के इलाकों में तेजी से हो रहे शहरीकरण और आवासीय परियोजनाओं की मांग को देखते हुए ईंट निर्माण के लिए मिट्टी खनन को भी वैध तरीके से शुरू करने की बड़ी राहत दी गई है. रांची जिले की कांके और अंगड़ा तहसील में कई प्रस्तावों को मंजूरी मिली है. कांके तहसील के कुम्हरिया मौजा में ब्रिक सॉइल माइनिंग फॉर मैसर्स बीवीएम ब्रिक्स और होचार मौजा में दो बड़े प्रोजेक्ट्स ब्रिक सॉइल माइनिंग फॉर मैसर्स नाम ब्रिक्स व ब्रिक सॉइल माइनिंग फॉर मैसर्स आरबीसी. ब्रिक्स को संचालन की हरी झंडी दी गई है. इसके अलावा कांके के ही सुगनु मौजा में ब्रिक सॉइल माइनिंग फॉर मैसर्स जय माता दी ब्रिक्स (जे.एम.डी.) को भी लंबी प्रक्रिया के बाद स्वीकृति मिल गई है. अनगड़ा तहसील के सलहन गांव में स्थित ब्रिक सॉइल माइनिंग फॉर मैसर्स लॉ ब्रिक्स को भी अनुमति दी गई है. इन सभी परियोजनाओं का प्रबंधन क्रिस्टल कंसल्टेंट्स द्वारा देखा जा रहा है. इस मंजूरी से राजधानी में निर्माण कार्यों के लिए ईंटों की किल्लत दूर होगी और पर्यावरण नियमों के दायरे में रहकर सुरक्षित खनन हो सकेगा.
