Ranchi: विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर गुरुवार को सदर अस्पताल, रांची में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस दौरान डॉक्टरों ने लोगों को सिकल सेल एनीमिया के प्रति जागरूक रहने और समय पर जांच कराने की सलाह दी. सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि सिकल सेल एनीमिया एक आनुवंशिक बीमारी है, लेकिन समय पर जांच और सही इलाज से इसके असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि सदर अस्पताल और जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में इसकी जांच मुफ्त में की जा रही है. गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच में भी सिकल सेल स्क्रीनिंग को शामिल किया गया है.
झारखंड में 32 लाख लोगों में सिकल सेल जीन
हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. अभिषेक रंजन ने बताया कि झारखंड की करीब 8 से 10 प्रतिशत आबादी, यानी लगभग 32 लाख लोगों में सिकल सेल जीन पाया जाता है. वहीं 1 से 2 प्रतिशत लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं. उन्होंने कहा कि सिकल सेल से पीड़ित बच्चों में पांच वर्ष की उम्र से पहले मृत्यु का खतरा अधिक रहता है. डॉ. अभिषेक ने बताया कि इस बीमारी में मरीज को हाथ-पैर, पेट और छाती में तेज दर्द, बार-बार बुखार, खून की कमी, कमजोरी, सांस फूलना और संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं. गंभीर मामलों में किडनी, फेफड़े और तिल्ली भी प्रभावित हो सकते हैं.

विवाह से पहले जांच की सलाह
डॉक्टरों ने कहा कि विवाह से पहले और नियमित रूप से सिकल सेल की जांच करानी चाहिए. इससे आने वाली पीढ़ियों को इस बीमारी से बचाने में मदद मिल सकती है. राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. राहुल किशोर सिंह ने बताया कि यदि माता-पिता दोनों में सिकल सेल ट्रेट हो, तो बच्चे में बीमारी होने की संभावना 25 प्रतिशत तक रहती है. इसलिए समय पर जांच बेहद जरूरी है.

जल्द चलेगा विशेष सर्वे अभियान
राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार सिन्हा ने बताया कि राज्य में जल्द ही विशेष सर्वे अभियान चलाया जाएगा. इसके तहत 0 से 5 वर्ष और 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के लोगों की मुफ्त जांच की जाएगी. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सिकल सेल मरीजों को निःशुल्क रक्त और जरूरी वैक्सीन भी उपलब्ध करा रही है.
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