Hazaribagh : नगर निगम और जिला प्रशासन की कथित संवेदनहीनता का मामला सामने आया है. वार्ड 17 के वार्ड जमादार सह बीएलओ दीपक कुमार की 26 मई को भीषण गर्मी और कार्य के दबाव के बीच ड्यूटी के दौरान तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें ब्रेन हेमरेज हुआ. हजारीबाग और रांची के विभिन्न अस्पतालों में 15 दिनों तक इलाज के बाद 14 जून को उनका निधन हो गया. मौत के बाद मजदूर संगठनों ने आक्रोश जताया और प्रदर्शन की चेतावनी दी, जिसके बाद नगर निगम के अधिकारी पीड़ित परिवार से मिलने उनके आवास पहुंचे.

अखिल भारतीय मजदूर संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सह अधिवक्ता विवेक कुमार वाल्मीकि के अनुसार, पीड़ित परिवार के पास आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद रांची के मेडिका अस्पताल में उसका लाभ नहीं मिला. इस संबंध में उपायुक्त से शिकायत भी की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. बेटे के इलाज के लिए दीपक की वृद्ध मां को भारी ब्याज पर कर्ज लेना पड़ा. उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी खुद की नगर निगम पेंशन भी पिछले 7 महीनों से लंबित है. आर्थिक तंगी के बीच दीपक को सैम्फोर्ड अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया.

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विवेक कुमार वाल्मीकि ने हजारीबाग नगर निगम के उप महापौर अविनाश कुमार यादव के रवैये पर भी तीखा आक्रोश व्यक्त किया है। वाल्मीकि ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि उप महापौर ने सिर्फ औपचारिकता पूरी करने के लिए अपने कार्यालय में ही एक शोक सभा का आयोजन कर इतिश्री कर ली और सोशल मीडिया पर फोटो चमका दी. उन्होंने कहा कि डिप्टी मेयर को अगर वाकई अपने इस ग्राउंड स्तर के कर्मचारी की मौत का दुख था, तो उन्हें दफ्तर की चारदीवारी में ढोंग करने के बजाय तुरंत मृतक दीपक कुमार के हरी नगर स्थित आवास पर पहुंचकर पीड़ित परिवार को ढाढस बंधाना चाहिए था. कार्यालय में बैठकर शोक मनाना सिर्फ अपनी संवेदनशीलता का दिखावा करना है, जमीनी हकीकत में इन जनप्रतिनिधियों के दिल में मजदूरों के लिए कोई जगह नहीं है.


