Jamtara : ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत संचालित झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) एवं सहकारिता विभाग, जामताड़ा के बेहतर समन्वय से जिले में ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण की एक उल्लेखनीय पहल देखने को मिली है. जिले के सभी छह प्रखंडों में सखी मंडल (स्वयं सहायता समूह) से जुड़ी किसान दीदियों की मांग पर सहकारिता विभाग द्वारा रिकॉर्ड समय में कुल 332.5 क्विंटल (33.25 टन) उन्नत किस्म का धान बीज (एमटीयू-7029) उपलब्ध कराया गया है. विशेष बात यह है कि किसानों को यह बीज 50 प्रतिशत अनुदान (सब्सिडी) पर उपलब्ध कराया जा रहा है. मानसून के आगमन और धान की बुवाई के उपयुक्त समय पर बीज की उपलब्धता से किसान दीदियों को समय पर खेती कार्य शुरू करने में बड़ी सहायता मिलेगी. इससे न केवल कृषि उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की आय और आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी.
जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में हुआ बीज वितरण
इसी क्रम में जामताड़ा सदर, नाला, फतेहपुर, नारायणपुर एवं कुंडहित क्लस्टर में विशेष बीज वितरण कार्यक्रम आयोजित किए गए. कार्यक्रमों में स्थानीय मुखिया एवं अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में किसान दीदियों के बीच धान बीज का वितरण किया गया. इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को कृषि आधारित आजीविका से जोड़ते हुए उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है. जिले के विभिन्न संकुलों (क्लस्टरों) में क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) के माध्यम से पारदर्शी ढंग से बीज वितरण किया जा रहा है. इस प्रक्रिया में मुखिया, वार्ड सदस्य सहित अन्य जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है, जिससे ग्रामीण स्तर पर सामुदायिक सहभागिता और विश्वास को बढ़ावा मिल रहा है.
विभागीय समन्वय बना सफलता की कुंजी
इस महत्वपूर्ण पहल को सफल बनाने में JSLPS जामताड़ा के जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) राहुल रंजन तथा सहकारिता विभाग के जिला सहकारिता पदाधिकारी (डीसीओ) सुजीत सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. दोनों विभागों के बीच बेहतर समन्वय, त्वरित निर्णय क्षमता और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की बदौलत किसानों को समय पर लाभ मिल सका. जिला सहकारिता पदाधिकारी सुजीत सिंह द्वारा लगातार दिए जा रहे सहयोग को ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. अधिकारियों के बीच इस प्रकार का विभागीय समन्वय (कन्वर्जेंस) यह दर्शाता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ यदि सही रणनीति और समयबद्ध तरीके से पहुंचाया जाए, तो उसका सकारात्मक प्रभाव सीधे ग्रामीण समुदाय पर पड़ता है.
कृषि आजीविका के लिए मील का पत्थर
जिला कार्यक्रम प्रबंधक राहुल रंजन ने कहा कि किसान दीदियों की मांग के अनुरूप सही समय पर 33.25 टन उन्नत धान बीज उपलब्ध होना जिले की कृषि आजीविका के लिए मील का पत्थर साबित होगा. उन्होंने इस उपलब्धि के लिए सहकारिता विभाग, कृषि विभाग एवं जिला सहकारिता पदाधिकारी सुजीत सिंह को बधाई देते हुए कहा कि विभागों के इस सहयोगात्मक प्रयास से जिले की हजारों किसान दीदियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिलेगी. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी इसी प्रकार के समन्वित प्रयासों के माध्यम से महिलाओं की आय वृद्धि, कृषि उत्पादकता में सुधार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का कार्य जारी रहेगा.



