Hazaribagh : जिला के केरेडारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है. रविवार अहले सुबह पचड़ा पंचायत की महिला बुधनी देवी पति महेश साव को सांप के डंसने के बाद परिजन इलाज के लिए केरेडारी CHC लेकर पहुंचे. परन्तु CHC में एक भी कर्मी ड्यूटी में नहीं मिले. परिजन CHC में बिना इलाज कराएं जिला अस्पताल ले गए. महिला के परिजनों का आरोप है कि स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने के बाद भी महिला को तत्काल चिकित्सकीय उपचार नहीं मिल सका, क्योंकि वहां उस समय कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था.

परिजनों के अनुसार घायल महिला के इलाज के लिए परिजन करीब एक घंटे तक डॉक्टर के आने का इंतजार करते रहे. परन्तु कोई चिकित्सक नहीं पहुंचे. बहरहाल परिजनों को मजबूरन निजी वाहन का व्यवस्था कर महिला के बेहतर इलाज के लिए हजारीबाग ले जाना पड़ा.
आपात स्थिति में भी डॉक्टर नहीं, तो ग्रामीण जाएं कहां?
इस घटना ने केरेडारी CHC की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. ग्रामीणों का सवाल है कि जब सांप के डंसने जैसे आपातकालीन मामले में भी मरीज को तत्काल डॉक्टर और उपचार उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, तो ग्रामीण क्षेत्र के लोग स्वास्थ्य सुविधा के लिए आखिर किस पर भरोसा करें? स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की उपलब्धता और जरूरी दवाइयों की व्यवस्था को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं. ऐसी स्थिति में दूर-दराज से इलाज के लिए आने वाले गरीब और जरूरतमंद मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
कार्रवाई होगी या फिर मामला ठंडे बस्ते में जाएगा?
लगातार सामने आ रही स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों के बीच अब ग्रामीण स्वास्थ्य विभाग से मामले की गंभीरता से जांच कराने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्रों का उद्देश्य ग्रामीणों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि आपात स्थिति में भी मरीजों को दूसरे शहरों की ओर जाना पड़े तो सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है. अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराता है या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह खानापूर्ति तक सीमित रह जाता है.
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