चाईबासा: सावन के चौथे सोमवार पर अनुसूचित जाति कल्याण संघ ने बोल बम कांवड़ियों के लिए लगाया सेवा शिविर

Chaibasa: सावन के चौथे सोमवार को श्रद्धा और आस्था से ओत-प्रोत माहौल में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने निकले बोल बम कांवड़ियों...

Noamundi
सेवा शिविर

Chaibasa: सावन के चौथे सोमवार को श्रद्धा और आस्था से ओत-प्रोत माहौल में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने निकले बोल बम कांवड़ियों की सेवा के लिए अनुसूचित जाति कल्याण संघ, नोवामुंडी की ओर से भव्य सेवा शिविर का आयोजन किया गया. यह सेवा शिविर टाटा डीएवी पब्लिक स्कूल के समीप आयोजित हुआ. सेवा शिविर का नेतृत्व समाजसेवी अध्यक्ष कृष्णा करवा एवं समाज सचिव नितेश कुमार ने संयुक्त रूप से किया. शिविर में बोल बम यात्रियों के लिए ठंडे पेयजल, विश्राम एवं भंडारे की व्यवस्था की गई. इस दौरान बड़ी संख्या में कांवड़ियों ने शिविर में रुककर प्रसाद ग्रहण किया और समिति की सेवा भावना की सराहना की.

हर वर्ष आयोजित होता है सेवा शिविर

अनुसूचित जाति कल्याण संघ सेवा समिति द्वारा सावन के पावन अवसर पर हर वर्ष सेवा शिविर का आयोजन किया जाता है. यह सेवा परंपरा कई वर्षों से लगातार चली आ रही है. शिविर में स्थानीय समाज के सदस्य बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं और कांवड़ियों की सेवा में अपना योगदान देते हैं.

समिति के सदस्य रहे मौजूद

कार्यक्रम में विशेष रूप से बबलू करुवा, अजय करवा, कुंदन करवा, श्रीकांत, किसन करुवा, बच्चन करवा,नन्दन करुवा ,राजेश कुमार, रंजीत करुवा, सुमित, बिसान, बनी करुवा, सुशील गुच्छियात, पुरन करुवा, जय करुवा, विकी करुवा, हेमंत करुवा समेत अन्य समिति सदस्य मौजूद रहे.

महिला सदस्यों ने भी निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

सेवा शिविर को सफल बनाने में समाज की महिला सदस्यों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही. रीमा करवा, तुलसी देवी, रानी, सुशीला, संजना, सबिता, अमृता करुवा, खुशी देवी, महिमा देवी, देवयानी, कविता, मंशा करवा, सीमा, डिंपी, कृषिका, सोनाली, संधिया, सुभद्रा करुवा, शिवानी, सिमरन और वीरा समेत कई महिला सदस्यों ने पूरे उत्साह के साथ कांवड़ियों की सेवा की.

कार्यक्रम के अंत में अनुसूचित जाति कल्याण संघ की ओर से सेवा शिविर को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी समिति सदस्यों एवं समाज के लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया गया. समिति ने कहा कि श्रद्धालुओं की सेवा करना समाज के लिए गौरव और पुण्य का कार्य है. सेवा, सहयोग और समर्पण की इस भावना ने सावन के पावन अवसर को और भी विशेष बना दिया.

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