Hazaribagh: शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने की व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं. शिकायत के अनुसार, अस्पताल में कार्यरत एक वार्ड बॉय से जुड़े कथित नेटवर्क द्वारा मरीजों के परिजनों को कुछ ही घंटों में रक्त उपलब्ध कराने का दावा किया जाता है. इसके बदले प्रति यूनिट 4 से 5 हजार रुपये तक वसूले जाने की शिकायत है. आरोप यह भी है कि यह कथित नेटवर्क मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अलावा जिले के विभिन्न निजी नर्सिंग होम में भी रक्त उपलब्ध कराने का दावा करता है.

ब्लड बैंक में देरी का फायदा उठाने का आरोप
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, चिकित्सक द्वारा मरीज को रक्त चढ़ाने की सलाह दिए जाने के बाद जब ब्लड बैंक से तत्काल रक्त उपलब्ध नहीं हो पाता, तब मरीज के परिजनों को कथित नेटवर्क से संपर्क कराया जाता है. दावा किया जाता है कि तीन से चार घंटे के भीतर रक्त की व्यवस्था कर दी जाएगी. इसके एवज में प्रति यूनिट चार से पांच हजार रुपये तक लिए जाने की बात कही जा रही है.
रिक्विजिशन फॉर्म जुटाने का आरोप
कथित नेटवर्क के काम करने के तरीके को लेकर भी शिकायत में गंभीर बातें कही गई हैं. आरोप है कि नेटवर्क से जुड़े लोग विभिन्न नर्सिंग होम और अस्पतालों से मरीजों के रक्त संबंधी रिक्विजिशन फॉर्म जुटाते हैं. इसके बाद मरीज के परिजनों से संपर्क कर रक्त की व्यवस्था कराने का भरोसा दिया जाता है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी कम अवधि में रक्त की व्यवस्था कहां से और किस प्रक्रिया के तहत की जाती है.
सबसे बड़ा सवाल-खून की जांच और स्रोत क्या?
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर सवाल रक्त के स्रोत और उसकी जांच को लेकर है. रक्त की वैधता, ग्रुपिंग, क्रॉस मैचिंग और संक्रमण संबंधी जांच निर्धारित प्रक्रिया के तहत होना मरीज की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है. यदि किसी मरीज को निर्धारित प्रक्रिया से बाहर जाकर रक्त उपलब्ध कराया जाता है तो इससे उसकी जान पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है.
‘खून की कमी नहीं, खून की कमाई’ का आरोप
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि ब्लड बैंक से रक्त मिलने में लगने वाले समय को कथित नेटवर्क कमाई के अवसर के रूप में इस्तेमाल कर रहा है. मरीज के परिजन पहले से ही बीमारी और इलाज की चिंता में रहते हैं. ऐसे में उन्हें तत्काल रक्त उपलब्ध कराने का भरोसा देकर हजारों रुपये वसूलने का आरोप बेहद गंभीर है. पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में कितनी सच्चाई है.
मेडिकल कॉलेज से लेकर निजी नर्सिंग होम तक नेटवर्क का दावा
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि कथित रक्त उपलब्ध कराने वाला नेटवर्क केवल शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के विभिन्न निजी नर्सिंग होम से भी जुड़ा हो सकता है. यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो यह महज एक कर्मचारी की भूमिका का मामला नहीं रहेगा, बल्कि रक्त की अवैध खरीद-फरोख्त और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रकरण बन सकता है.
अस्पताल कर्मचारी की भूमिका की जांच जरूरी
पूरे मामले में अस्पताल के संबंधित वार्ड बॉय की कथित भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए. जांच एजेंसियों और अस्पताल प्रबंधन को यह पता लगाना होगा कि क्या कर्मचारी वास्तव में मरीजों और कथित रक्त उपलब्ध कराने वाले लोगों के बीच संपर्क का काम करता है. साथ ही यह भी जांच जरूरी है कि मरीजों के रक्त संबंधी दस्तावेज और रिक्विजिशन फॉर्म बाहरी लोगों तक कैसे पहुंच रहे हैं.
स्वास्थ्य विभाग से जांच की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन से पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की जा रही है. जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि कथित तौर पर मरीजों को उपलब्ध कराया जाने वाला रक्त कहां से आता है, उसकी जांच किस प्रयोगशाला या ब्लड बैंक में होती है, रक्त का मिलान किस प्रक्रिया से किया जाता है और इसके बदले पैसे लेने का कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है या नहीं.
मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ का आरोप
रक्त जीवन बचाने वाली चिकित्सा आवश्यकता है, लेकिन यदि इसकी आड़ में आर्थिक लाभ कमाने का कोई खेल चल रहा है तो यह बेहद गंभीर मामला है. मरीज और उनके परिजन मजबूरी में किसी भी कीमत पर रक्त की व्यवस्था करने को तैयार हो जाते हैं. ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह शिकायत की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाए और यदि आरोप सही पाए जाएं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे.
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