1 सितंबर से झारखंड में SFI का ‘स्कूल बचाओ’ अभियान, जिलों के स्कूलों का होगा सर्वे

Ranchi: शिक्षा व्यवस्था और छात्रों की समस्याओं को लेकर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने सरकार के खिलाफ मोर्चा तेज करने का...

SFI’s ‘Save Schools’ campaign in Jharkhand to begin on September 1; schools across districts to be surveyed.

Ranchi: शिक्षा व्यवस्था और छात्रों की समस्याओं को लेकर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने सरकार के खिलाफ मोर्चा तेज करने का ऐलान किया है. SFI की संयुक्त सचिव ऐशी घोष ने सोमवार को सत्य भारती में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि संगठन 1 सितंबर से झारखंड समेत पूरे देश में ‘स्कूल बचाओ’ अभियान शुरू करेगा. ऐशी घोष ने कहा कि हाल के छात्र आंदोलनों से कुछ मांगों पर सरकार को कदम उठाना पड़ा है, लेकिन सिर्फ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को छात्रों की समस्याओं का समाधान नहीं माना जा सकता. उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में अभी कई ऐसी समस्याएं हैं, जिन पर सरकार को गंभीरता से काम करने की जरूरत है.

स्कूलों की जमीनी स्थिति पता करेगा SFI

‘स्कूल बचाओ’ अभियान के दौरान SFI के कार्यकर्ता और प्रतिनिधि अलग-अलग जिलों के स्कूलों में जाएंगे. वहां स्कूलों की सुविधाओं, पढ़ाई और छात्रों से जुड़ी समस्याओं का सर्वे किया जाएगा. सर्वे के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर झारखंड सरकार को सौंपी जाएगी.

पांच साल में पूरी हो रही चार साल की डिग्री

ऐशी घोष ने कहा कि छात्रों से बातचीत में पढ़ाई के सत्र में देरी की समस्या सामने आई है. चार साल में पूरी होने वाली स्नातक की पढ़ाई कई छात्रों को पांच साल तक पूरी करनी पड़ रही है. इसका सीधा असर छात्रों के रोजगार के आवेदन और आगे की पढ़ाई पर पड़ रहा है. उन्होंने झारखंड में छात्रवृत्ति समय पर नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया. SFI के मुताबिक आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के कई छात्रों के लिए छात्रवृत्ति पढ़ाई जारी रखने का महत्वपूर्ण सहारा है. समय पर आर्थिक मदद नहीं मिलने से छात्रों के सामने पढ़ाई छोड़ने की स्थिति बन रही है.

छात्राओं और आदिवासी छात्रों के लिए हॉस्टल की कमी

SFI ने छात्राओं और आदिवासी छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल नहीं होने पर भी चिंता जताई. संगठन का कहना है कि दूरदराज के इलाकों से आने वाले छात्रों को कॉलेज में दाखिला मिलने के बाद रहने की सुविधा नहीं मिलती. छात्रवृत्ति में देरी के साथ यह समस्या उनकी पढ़ाई को और मुश्किल बना देती है.

परीक्षा एजेंसियों की भूमिका पर सवाल

प्रतियोगी परीक्षाओं में निजी या थर्ड-पार्टी एजेंसियों की भूमिका पर भी SFI ने सवाल उठाए. ऐशी घोष ने कहा कि कुछ ऐसी एजेंसियों को परीक्षा की जिम्मेदारी दी जा रही है, जिन पर पहले भी अनियमितता के आरोप लग चुके हैं. उन्होंने सरकार से पूछा कि ऐसी एजेंसियों पर भरोसा करने की जरूरत क्यों पड़ रही है.

छात्रों पर कार्रवाई का भी विरोध

SFI ने छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि छात्रों को अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अधिकार है. संगठन ने सरकार से अपील की कि छात्रों की समस्याओं का समाधान दमन या कार्रवाई से नहीं, बल्कि बातचीत और संवाद के जरिए किया जाए.

ALSO READ : गिरिडीह: पंचायत सचिवालय में प्रमाणपत्र निर्माण को लेकर विशेष शिविर, ग्रामीणों को पंचायत स्तर पर मिली सुविधा

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *