Ranchi: झारखंड पुलिस महकमे में अधिकारियों और जवानों से जुड़े कई प्रशासनिक मामले, प्रोन्नति और वित्तीय लाभ पिछले लंबे समय से लंबित पड़े हैं. स्थानांतरण, पदस्थापन और कल्याणकारी योजनाओं की प्रक्रिया में हो रही देरी से पुलिस अधिकारियों में भारी असंतोष है. इस संदर्भ में झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने डीजीपी से गुहार लगाते हुए प्राथमिकता के आधार पर समस्याओं के समाधान की मांग की है.

स्थानांतरण और पदस्थापन की नीति ठप
गृह या ऐच्छिक जिलों में पदस्थापन को लेकर पिछले दो वर्षों से स्थानांतरण समिति की कोई बैठक आयोजित नहीं की गई है. नियम के अनुसार दो वर्ष या उससे कम सेवा अवधि वाले अधिकारियों को यह सुविधा मिलती है, लेकिन बैठक न होने के कारण कई अधिकारी बिना इस नीति का लाभ पाए ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं.
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में एक ही जगह लंबे समय से तैनाती
चाईबासा, लातेहार, गढ़वा और पलामू जैसे अत्यंत संवेदनशील व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कई पुलिसकर्मी पिछले 10 से अधिक वर्षों से एक ही जिला या इकाई में तैनात हैं. इनके स्थानांतरण को लेकर लंबे समय से कोई नीतिगत फैसला नहीं लिया गया है.
ASI से SI, सब इंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर व इंस्पेक्टर से DSP में प्रमोशन की फाइलें अटकीं
– पुलिस महकमे के अलग-अलग स्तरों पर प्रोन्नति की फाइलें अटकी हुई हैं.
– ASI से SI पद पर प्रोन्नति:के पद पर प्रोन्नति के कई मामले काफी समय से लंबित हैं.
– सब इंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर में प्रोन्नति के लिए रोस्टर क्लीयरेंस की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी 158 पदों पर प्रोन्नति का फैसला आगे नहीं बढ़ सका है.
– इंस्पेक्टर से DSP के 25 पदों पर प्रोन्नति की फाइल रोस्टर क्लियर होने के बावजूद अटकी पड़ी है.
– क्लोज कैडर वाली विशेष शाखा में पुलिस निरीक्षक के 212 पद लंबे समय से खाली हैं, जिससे विभागीय कार्य प्रभावित हो रहा है.
कल्याणकारी कोष की बैठकें न होने से वित्तीय सहायता में देरी
केंद्रीय कल्याण कोष, शिक्षा कोष और परोपकारी कोष की नियमित बैठकें नहीं हो रही हैं. इसके कारण बीमार, पीड़ित या दिवंगत पुलिसकर्मियों के परिजनों को मिलने वाली तात्कालिक वित्तीय सहायता में अत्यधिक विलंब हो रहा है.
ACP और MACP का लाभ और लंबित मामले
सशस्त्र बल के अधिकारियों को पिछले दो वर्षों से ACP और MACP का लाभ नहीं मिल सका है. इसके अलावा, सहायक अवर निरीक्षक स्तर के लगभग 700 से 800 मामले वर्तमान में मुख्यालय स्तर पर प्रक्रियाधीन पड़े हुए हैं.
निष्क्रिय पड़ा सेवानिवृत्ति कोषांग
सेवानिवृत्त होने वाले पुलिसकर्मियों को समय पर पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य देय लाभ दिलाने के उद्देश्य से गठित ‘सेवानिवृत्ति कोषांग वर्तमान में पूरी तरह निष्क्रिय पड़ा है, जिससे सेवानिवृत्त जवानों को दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं.
झारखंड पुलिस एसोसिएशन की चार प्रमुख मांगें
– शिकायत कोषांग में प्रतिनिधित्व: पुलिस मुख्यालय की शिकायत कोषांग की बैठकों में झारखंड पुलिस एसोसिएशन के पदाधिकारियों को आधिकारिक सदस्य के रूप में नामित किया जाए
– पत्रों की प्रतिलिपि अनिवार्य हो: पुलिसकर्मियों के कल्याण से संबंधित मुख्यालय द्वारा जारी किए जाने वाले सभी आधिकारिक पत्रों की प्रतिलिपि एसोसिएशन को अनिवार्य रूप से भेजी जाए.
– मासिक ‘पुलिस सभा’ का आयोजन: राज्य के सभी एसएसपी, एसपी और कमांडेंट को हर महीने अनिवार्य रूप से ‘पुलिस सभा’ आयोजित करने तथा उसकी रिपोर्ट मुख्यालय व महासंघ को भेजने का निर्देश दिया जाए.
– कार्यों की समय-सीमा तय हो: विभिन्न शाखाओं में फाइलों को लंबे समय तक लंबित रखने की परंपरा समाप्त करने के लिए आवेदनों के निष्पादन की एक निश्चित समय-सीमा तय की जाए.
– झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने आग्रह किया है कि इन सभी बिंदुओं पर एक निश्चित समय-सीमा निर्धारित कर प्राथमिकता के आधार पर त्वरित निर्णय लिया जाए, ताकि पुलिसकर्मियों को उनके न्यायसंगत अधिकार मिल सकें.
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