Ranchi: झारखंड और बिहार की सीमा पर स्थित कई महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाएं आज भी अंतरराज्यीय विवादों की भेंट चढ़ी हुई हैं. दोनों राज्यों के बीच पानी के बंटवारे, निर्माण और रखरखाव को लेकर MoU (समझौता) होने के बावजूद जमीन पर स्थिति जस की तस बनी हुई है. इन अटके हुए मुद्दों के कारण किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने का सपना आज भी अधूरा है. जिन प्रोजेक्टेस पर पेंच फंसा हुआ है, उसमें नॉर्थ कोयल जलाशय परियोजना, बथाने जलाशय परियोजना और बटेश्वरस्थान पंप नहर परियोजना शामिल है.

क्या है विवाद? क्या है पेंच?
नॉर्थ कोयल जलाशय परियोजना
यह परियोजना पलामू जिले में उत्तर कोएल नदी पर स्थित है, जिसके तहत कुटकू के पास बांध और मोहम्मदगंज के पास पिक-अप बैराज का निर्माण शामिल है. दोनों राज्यों के बीच सहमति के बाद भी काम पूरी गति से आगे नहीं बढ़ पा रहा है. इस परियोजना से झारखंड में 12,470 हेक्टेयर और बिहार में 1,11,800 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का लक्ष्य है. नदी प्रणाली की 75% निर्भर जल उपलब्धता 987 एमसीएम है, जिसे दोनों राज्यों के बीच सिंचाई, नगरपालिका और औद्योगिक लाभ के अनुपात में बांटा जाना है.
बथाने जलाशय परियोजना
इस परियोजना के साझा घटकों का निर्माण झारखंड सरकार के संबंधित विभाग द्वारा जमा कार्य (डिपॉजिट वर्क) के रूप में किया जाना है और इसकी लागत का वहन दोनों राज्य सिंचाई लाभ के अनुपात में करेंगे. लागत साझा करने और क्रियान्वयन की धीमी गति के कारण यह प्रोजेक्ट वर्षों से लंबित है. झारखंड में 1,660 हेक्टेयर और बिहार में 10,466 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है. समझौते के तहत झारखंड सरकार को बांध के जीवन और नियमों को प्रभावित किए बिना जलाशय में मत्स्य पालन, लिफ्ट सिंचाई और पर्यटन/मनोरंजन गतिविधियों के विकास का अधिकार दिया गया है, लेकिन इसका धरातल पर उतरना बाकी है.
बटेश्वरस्थान पंप नहर योजना
गंगा नदी के दाहिने तट पर बिहार में एक पंपिंग स्टेशन और एक उच्च स्तरीय मुख्य नहर से जुड़ी यह योजना झारखंड की सीमा में प्रवेश करती है और फिर वापस बिहार में जाती है. अंतरराज्यीय समन्वय की कमी और तकनीकी-प्रशासनिक अड़चनों के कारण इस योजना का पूरा लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है. बिहार में 22,328 हेक्टेयर और झारखंड में 4,887 हेक्टेयर भूमि लाभान्वित होनी है. गंगा नदी से पंप किए जाने वाले 978 क्यूसेक पानी को दोनों राज्यों के बीच सिंचाई लाभ के अनुपात में साझा किया जाना तय हुआ था.

