Hazaribagh: जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले तीन लाख से अधिक विद्यार्थियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. आकाशीय बिजली से बचाव के लिए जिले के 1485 सरकारी प्राथमिक, मध्य एवं उच्च विद्यालयों में तड़ित चालक लगाने की योजना वर्ष 2011 में शुरू हुई थी. सरकार की ओर से प्रत्येक तड़ित चालक के लिए करीब 36 हजार रुपये की राशि निर्धारित की गई थी. इसके बावजूद आज स्थिति यह है कि कई स्कूलों में तड़ित चालक लगे ही नहीं और जिन स्कूलों में लगाए गए थे, उनमें से कई उपकरण चोरी हो चुके हैं या रखरखाव के अभाव में खराब पड़े हैं. शिक्षा विभाग के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि योजना के तहत सभी स्कूलों में तड़ित चालक लगाए गए थे. वहीं जमीनी हकीकत इस दावे से अलग तस्वीर पेश कर रही है. कई विद्यालयों में जांच के दौरान तड़ित चालक नहीं होने की बात सामने आने का दावा किया जा रहा है. इससे बरसात के मौसम में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है.

2011 से 2013 के बीच हुआ था काम
आकाशीय बिजली से होने वाली घटनाओं में स्कूली बच्चों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने वर्ष 2006-07 में सरकारी विद्यालयों में तड़ित चालक लगाने का निर्णय लिया था. हजारीबाग जिले में इस योजना पर वर्ष 2011 से काम शुरू हुआ. विभाग के अनुसार वर्ष 2011, 2012 और 2013 के दौरान जिले के सरकारी स्कूलों में तड़ित चालक लगाने का काम किया गया. जिले में उस समय 1485 सरकारी विद्यालयों को योजना के दायरे में रखा गया था. प्रत्येक विद्यालय में तड़ित चालक लगाने के लिए करीब 36 हजार रुपये की राशि निर्धारित थी. इस हिसाब से योजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने थे.
कई स्कूलों में उपकरण लगाए जाने का दावा धरातल पर कमजोर
विभागीय दावे के विपरीत कई विद्यालयों में तड़ित चालक नहीं होने की बात सामने आई है. शहर के दीपूगढ़ा स्थित नव प्राथमिक विद्यालय मरियम टोली इसका उदाहरण बताया जा रहा है, जहां तड़ित चालक लगा ही नहीं है. कटकमदाग क्षेत्र के मध्य विद्यालय सुल्ताना में भी तड़ित चालक नहीं होने की बात सामने आई है. स्थानीय स्तर पर यह भी बताया गया कि शहर के कुछ विद्यालयों में ही तड़ित चालक लगाए गए थे. इनमें भी मुख्य रूप से बहुमंजिला विद्यालय भवन शामिल रहे. ऐसे विद्यालयों की संख्या चार-पांच के आसपास बताई जा रही है. इससे योजना के क्रियान्वयन और निगरानी पर सवाल खड़े होते हैं.
चोरी और खराब होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था बेकार
शिक्षा विभाग के जूनियर इंजीनियर कालेश्वर महतो के अनुसार, योजना के तहत सभी स्कूलों में तड़ित चालक लगाए गए थे. उनके मुताबिक बाद में कई विद्यालयों से उपकरण चोरी हो गए, जबकि जहां उपकरण बचे हैं, उनमें से कई रखरखाव के अभाव में खराब हो चुके हैं. अगर विभाग के इस दावे को सही माना जाए तो भी सवाल यही है कि इतने महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच और रखरखाव की व्यवस्था क्यों नहीं की गई. बरसात के मौसम में तड़ित चालक की उपयोगिता सबसे अधिक होती है, ऐसे में वर्षों से खराब पड़े उपकरणों को दुरुस्त नहीं कराया जाना बच्चों की सुरक्षा के प्रति गंभीर लापरवाही मानी जा सकती है.
तीन लाख से अधिक बच्चों की सुरक्षा का सवाल
जिले के सरकारी स्कूलों में तीन लाख से अधिक विद्यार्थी पढ़ते हैं. इनमें बड़ी संख्या प्राथमिक और मध्य विद्यालयों के बच्चों की है. ग्रामीण क्षेत्रों में कई विद्यालय खुले और ऊंचे स्थानों पर स्थित हैं, जहां बारिश और गरज-चमक के दौरान आकाशीय बिजली गिरने का खतरा बना रहता है. हजारीबाग में आकाशीय बिजली से होने वाली घटनाएं भी चिंता बढ़ाने वाली हैं. इसी वर्ष पिछले तीन महीनों में जिले में वज्रपात से सात लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है. सात अगस्त को कटकमसांडी के कंचनपुर गांव में खेत में काम कर रहे एक दंपती की भी आकाशीय बिजली की चपेट में आने से मौत हो गई थी. ऐसे में स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए लगाए जाने वाले तड़ित चालक की स्थिति की नियमित जांच और तत्काल मरम्मत बेहद जरूरी हो जाती है.
कैसे काम करता है तड़ित चालक, तड़ित चालक का उद्देश्य
आकाशीय बिजली को भवन पर सीधे गिरने से रोककर सुरक्षित तरीके से जमीन तक पहुंचाना है. सामान्य तौर पर भवन की छत के सबसे ऊपरी हिस्से में नुकीली धातु की छड़ लगाई जाती है. इससे जुड़ा मोटा चालक तार भवन के नीचे अर्थिंग व्यवस्था तक पहुंचाया जाता है. भूमि के अंदर निर्धारित गहराई पर अर्थिंग की व्यवस्था की जाती है, ताकि आकाशीय बिजली को सुरक्षित रूप से जमीन में प्रवाहित किया जा सके. इस तरह बिजली भवन की संरचना को नुकसान पहुंचाने के बजाय चालक के माध्यम से जमीन में चली जाती है.
विभाग ने जांच का दिया भरोसा
जिला शिक्षा अधीक्षक आकाश कुमार ने कहा कि सभी सरकारी स्कूलों में तड़ित चालक लगाए गए थे. उन्होंने माना कि कुछ स्कूलों में उपकरण चोरी होने की बात सामने आई है और कुछ जगहों पर उपकरण खराब हुए हैं. उन्होंने कहा कि जिन स्कूलों में तड़ित चालक नहीं हैं, वहां इसे लगाया जाएगा. साथ ही, किन स्कूलों में तड़ित चालक नहीं लगा है, इसकी जांच कराने की बात कही. अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की योजना के तहत लगाए गए सुरक्षा उपकरणों की मौजूदा स्थिति का व्यापक सर्वे कब होगा और कितने स्कूलों में वास्तव में तड़ित चालक काम कर रहे हैं. बरसात के बीच इस जांच और मरम्मत में देरी हुई तो सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों की सुरक्षा पर बना खतरा बरकरार रहेगा.
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