Hazaribagh: केरेडारी अंचल क्षेत्र में संचालित नॉर्थ वेस्ट पकरी बरवाडीह, केरेडारी, चट्टीबारियातु और चन्द्रगुप्ता कोयला खनन परियोजनाओं का असर अब खेती पर भी साफ दिखाई देने लगा है. इन चारों कोयला परियोजनाओं के कारण करीब 1400 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि प्रभावित हो चुकी है. इसका सीधा असर धान और मकई की खेती पर पड़ा है. पर्याप्त बारिश के बावजूद प्रभावित क्षेत्रों में शत-प्रतिशत धनरोपनी नहीं हो सकी है. जिला कृषि विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है. आरोप है कि विभाग ने केरेडारी अंचल से वास्तविक स्थिति की जानकारी लिए बिना पिछले वर्ष के लक्ष्य को ही इस वर्ष भी दोहरा दिया. इससे कोयला परियोजनाओं से प्रभावित कृषि भूमि और वास्तविक खेती की स्थिति का सही आकलन नहीं हो पा रहा है.

24 अगस्त तक 83 फीसदी हुई धान की रोपाई
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, केरेडारी प्रखंड में 24 अगस्त तक करीब 83 फीसदी धान की रोपाई हो चुकी है. हालांकि, कोयला परियोजनाओं के कारण प्रभावित कृषि भूमि को अलग कर देखा जाए तो वास्तविक स्थिति इससे अलग हो सकती है. वर्तमान में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क है. खेतों में पर्याप्त नमी बनी हुई है. बीच-बीच में हुई बारिश के कारण धान के पौधे फिलहाल स्वस्थ और हरे-भरे दिखाई दे रहे हैं. किसानों को उम्मीद है कि आगे हल्की बारिश होती रही तो फसल की स्थिति बेहतर बनी रह सकती है.
10 अगस्त तक 283.8 एमएम हुई बारिश
कृषि विभाग के अनुसार, 10 अगस्त तक केरेडारी क्षेत्र में 283.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. सामान्य तौर पर इस अवधि तक करीब 300 से 325 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी. यानी सामान्य वर्षापात की तुलना में बारिश कुछ कम रही है. आंकड़ों के अनुसार 10 जून से 10 जुलाई 2026 तक 85.8 मिलीमीटर तथा 10 जुलाई से 10 अगस्त तक 198 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. अलग-अलग दिनों में भी क्षेत्र में अच्छी बारिश हुई, जिसमें 16 जुलाई को 23.4 एमएम, 17 जुलाई को 36.4 एमएम, 21 जुलाई को 22.6 एमएम, 22 जुलाई को 25.6 एमएम और 4 अगस्त को 30.2 एमएम बारिश दर्ज की गई.
कोयला परियोजनाओं से खेती का रकबा घटा
केरेडारी क्षेत्र में कोयला खनन परियोजनाओं का विस्तार होने के साथ बड़ी मात्रा में कृषि योग्य भूमि प्रभावित हुई है. करीब 1400 हेक्टेयर भूमि पर परियोजनाओं का प्रभाव पड़ने के कारण खेती का पारंपरिक रकबा घटा है. ऐसे में कृषि विभाग द्वारा पुराने लक्ष्य के आधार पर धान और मकई की खेती का आकलन किए जाने से जमीनी हकीकत और सरकारी आंकड़ों के बीच अंतर की आशंका बनी हुई है. किसानों के अनुसार जिस भूमि पर पहले हर वर्ष खेती होती थी, उसका एक बड़ा हिस्सा अब खनन परियोजनाओं की जद में आ चुका है.
प्रभावित भूमि का सटीक आंकड़ा कृषि विभाग के पास नहीं
प्रखंड कृषि पदाधिकारी अनुज कुमार ने भी स्वीकार किया कि कोयला परियोजनाओं के कारण कुछ कृषि योग्य भूमि में खेती नहीं हो सकी है. हालांकि प्रभावित भूमि का सटीक आंकड़ा उनके पास उपलब्ध नहीं है. उन्होंने बताया कि इस वर्ष बारिश कुछ कम जरूर हुई है, लेकिन खेतों में नमी बनी हुई है और वर्तमान में धान की फसल की स्थिति अच्छी है. उन्होंने यह भी कहा कि जिला स्तर से इस वर्ष भी पुराने आंकड़े के आधार पर लक्ष्य भेजा गया है.
किसानों के लिए मौसम पर टिकी उम्मीद
वर्तमान में केरेडारी के खेतों में धान की फसल लहलहा रही है. हालांकि मौसम शुष्क रहने से किसानों की चिंता बढ़ी हुई है. धान की फसल के लिए आगे समय पर बारिश होना जरूरी है. किसानों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में हल्की बारिश होती रहेगी, जिससे खेतों में नमी बनी रहेगी और फसल को नुकसान नहीं होगा. वहीं, कोयला परियोजनाओं के कारण लगातार घटती कृषि भूमि और विभागीय आंकड़ों में वास्तविक स्थिति शामिल नहीं किए जाने का मुद्दा आने वाले समय में किसानों के लिए बड़ी चिंता बन सकता है.

