सरायकेला: श्मशान घाट की जमीन पर स्वास्थ्य केंद्र निर्माण का विरोध, ग्रामीण बोले, 200 साल पुरानी आस्था से खिलवाड़

Saraikela: चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के कदमडीह, कुम्हारपाड़ा और सिकली गांव के ग्रामीणों ने श्मशान घाट की जमीन पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाए...

Seraikela: Villagers Oppose Health Centre Construction on Cremation Ground Land in Chandil, Say It Undermines 200-Year-Old Faith
Seraikela: Villagers Oppose Health Centre Construction on Cremation Ground Land in Chandil, Say It Undermines 200-Year-Old Faith

Saraikela: चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के कदमडीह, कुम्हारपाड़ा और सिकली गांव के ग्रामीणों ने श्मशान घाट की जमीन पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाए जाने का विरोध किया है. ग्रामीणों का कहना है कि यह जमीन 200 साल से अधिक समय से उनके श्मशान घाट के रूप में उपयोग में है.

ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले को लेकर उन्होंने मंत्री दीपक बिरुवा, चांडिल अंचल के अंचल अधिकारी और सरायकेला-खरसावां के उपायुक्त को लिखित शिकायत देकर हस्तक्षेप की मांग की है.

ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है और श्मशान घाट की जमीन पर निर्माण कार्य जारी है.

200 साल से श्मशान घाट के रूप में इस्तेमाल होने का दावा

ग्रामीणों के अनुसार, मौजा कदमडीह, खाता संख्या 112, प्लॉट संख्या 273, किस्म-अनाबाद बिहार सरकार, रकबा 1 एकड़ 57 डिसमिल जमीन पर उनके पूर्वजों के समय से आदिवासी, कुम्हार, घासी, भूमिज, कर्मकार, मछुआ, भुइयां समेत सभी जाति के लोग हिंदू रीति-रिवाज से श्मशान घाट के रूप में उपयोग करते आ रहे हैं. इस जमीन से उनकी आस्था और श्रद्धा जुड़ी हुई है.

भू-माफिया पर जमीन हड़पने का आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि चांडिल के कुछ भू-माफियाओं और बाहर के ठेकेदारों द्वारा इस श्मशान घाट की जमीन को हड़पने के लिए वहां स्वास्थ्य केंद्र बनाया जा रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि ठेकेदार उपेंद्र सिंह और प्रदीप गिरी, बिहारी कॉलोनी निवासी, द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कार्य कराया जा रहा है.

ग्रामीणों का कहना है कि अगर स्वास्थ्य केंद्र बनाना ही है तो दूसरी जगह बनाएं, हमारे 200 साल पुराने श्मशान घाट पर ही क्यों? यह हमारी आस्था के साथ खिलवाड़ है. हम यहां स्वास्थ्य केंद्र नहीं बनने देंगे.

ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने मंत्री दीपक बिरुवा, चांडिल प्रखंड के अंचल अधिकारी और सरायकेला उपायुक्त को लिखित आवेदन देकर हस्तक्षेप की मांग की थी, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.

कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी बात नहीं सुनी गई तो तीनों गांव के लोग मिलकर आंदोलन करने को बाध्य होंगे.

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