Ranchi: केंद्र सरकार के माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) यानी एमएमडीआर अधिनियम में किए गए नए संशोधनों ने झारखंड के राजनीतिक और आर्थिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है. इसी कड़ी में, वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने मंगलवार को प्रोजेक्ट भवन स्थित कार्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की. इस मंथन का मुख्य एजेंडा प्रस्तावित संशोधनों के कारण झारखंड की अर्थव्यवस्था और राजस्व पर पड़ने वाले दूरगामी प्रभावों का आकलन करना था.

धारा 9 डी और सेस पर टिकी खास निगाहें
बैठक के दौरान मुख्य रूप से प्रस्तावित धारा 9D के प्रावधानों को लेकर गहन विचार-विमर्श किया गया. विशेषज्ञों के अनुसार, यह धारा खनन क्षेत्रों से मिलने वाले सेस और राजस्व गणित को प्रभावित कर सकती है. इसके अलावा, कोल कंपनियों के पास वर्षों से अटकी राज्य की लंबित बकाया राशि के मामलों को भी गंभीरता से खंगाला गया. वित्त मंत्री ने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा हमारी आर्थिक रीढ़ है. राज्य के राजस्व और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है.
आर्थिक नुकसान के हर पहलू की होगी स्टडी
सरकार अब इस बात की तह तक जाने की तैयारी में है कि केंद्र के इन संशोधनों से राज्य को कितना संभावित नुकसान उठाना पड़ सकता है. वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया है कि हर एक पहलू का तकनीकी और कानूनी अध्ययन कराया जाएगा, ताकि झारखंड के हितों पर आंच न आए. राज्य सरकार जल्द ही इन रिपोर्टों के आधार पर अपनी रणनीतिक दिशा तय करेगी. खनिज बहुल झारखंड के पास अपनी संपदा के बल पर आत्मनिर्भर बनने का अवसर है, ऐसे में केंद्र के नए कानूनी दांव-पेंच राज्य की तिजोरी को कितना प्रभावित करते हैं, यह आने वाला वक्त तय करेगा.बैठक में प्रशांत कुमार, वित्त विभाग के सचिव, अमित कुमार, वाणिज्य-कर विभाग के सचिव, राहुल सिन्हा, खान एवं भूविज्ञान विभाग के निदेशक सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद थे.

