Ranchi: डोरंडा स्थित पलाश सभागार में आज झारखंड वन विभाग की समीक्षा बैठक हुई. प्रधान मुख्य वन संरक्षक सह हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स संजीव कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में वन संरक्षण से लेकर मानव-वन्यजीव संघर्ष, वन अग्नि और तकनीक के इस्तेमाल जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई. अधिकारियों को योजनाओं को सिर्फ कागजों तक सीमित न रखकर जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करने का निर्देश दिया गया.

बैठक में PCCF ने कहा कि विभाग की योजनाओं की लगातार निगरानी जरूरी है. क्षेत्रीय अधिकारी तय लक्ष्यों की नियमित समीक्षा करें और निर्धारित समय के भीतर काम पूरा करें. उन्होंने वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विकास की योजनाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया.
ग्रामीणों को जोड़कर मजबूत होगा वन संरक्षण
वन बचाने के लिए स्थानीय लोगों की भागीदारी को अहम बताते हुए अधिकारियों से ग्रामीणों की आजीविका से जुड़े कार्यक्रमों को बढ़ावा देने को कहा गया. विभाग का मानना है कि जंगलों पर निर्भर समुदायों को बेहतर अवसर मिलने से वन संरक्षण की मुहिम को और मजबूती मिलेगी.
मानव-वन्यजीव संघर्ष पर बनेगा लॉन्ग टर्म प्लान
समीक्षा बैठक में मानव-वन्यजीव संघर्ष को प्रमुख मुद्दे के रूप में लिया गया. संजीव कुमार ने कहा कि इस समस्या से केवल तत्काल राहत के उपायों से निपटना पर्याप्त नहीं है. इसके लिए लंबे समय की कार्ययोजना तैयार करनी होगी. वन्यजीवों को सुरक्षित रखने के साथ आम लोगों की जान-माल की सुरक्षा भी रणनीति का हिस्सा होगी. इसके लिए विभागीय स्तर पर बेहतर तालमेल, निगरानी और ग्रामीण इलाकों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया.
डिजिटल सिस्टम से होगी जंगलों की निगरानी
बैठक में वन विभाग में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल की भी समीक्षा की गई. वन क्षेत्रों की मैपिंग, डिजिटल रिकॉर्ड, कर्मचारियों से जुड़े डाटा और कार्ययोजनाओं को अपडेट करने की स्थिति पर अधिकारियों से जानकारी ली गई. PCCF ने डिजिटल व्यवस्था का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने को कहा, ताकि काम की निगरानी आसान हो और विभागीय कार्यों में पारदर्शिता बढ़े.
‘संवाद’ पत्रिका का विमोचन
बैठक के दौरान वन विभाग की त्रैमासिक पत्रिका ‘संवाद’ का विमोचन भी किया गया. संजीव कुमार ने कहा कि पत्रिका के जरिए विभाग की गतिविधियों, उपलब्धियों और नए प्रयोगों का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा. उन्होंने कहा कि वन और पर्यावरण से जुड़े काम लंबे समय तक चलने वाले होते हैं, इसलिए पूर्व में किए गए कार्यों और अनुभवों का दस्तावेजीकरण भविष्य में अधिकारियों के लिए उपयोगी साबित होगा.
वन अग्नि से लेकर लंबित प्रस्तावों तक हुई चर्चा
बैठक में ऑडिट मामलों की स्थिति, वन संरक्षण एवं संवर्धन अधिनियम के तहत लंबित प्रस्ताव, खराब हो चुकी वन भूमि का पुनर्वास और संयुक्त वन प्रबंधन समितियों को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई. इसके अलावा स्थानीय और देशज प्रजातियों के संरक्षण, वन अग्नि की रोकथाम और विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई. अधिकारियों ने अब तक हुए कार्यों की रिपोर्ट रखी और आगे की कार्ययोजना पर विचार किया.

