SAURAV SINGH

रांची: झारखंड के गठन से लेकर अब तक नक्सलवाद के विरुद्ध चली लंबी और खूनी लड़ाई अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है. राज्य में शांति बहाली के लिए जहां सुरक्षाबलों ने अदम्य साहस का परिचय दिया, वहीं 556 जवानों ने अपना सर्वोच्च बलिदान भी दिया. आज इसी शहादत और रणनीतिक प्रहार का नतीजा है कि झारखंड पूर्णतः नक्सलमुक्त होने के कगार पर खड़ा है.
556 सुरक्षाकर्मियों ने देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए जान गंवाई
झारखंड में नक्सली हिंसा का इतिहास काफी दर्दनाक रहा है. आंकड़ों के मुताबिक, राज्य गठन (साल 2000) से अब तक शहीद जवान 556 सुरक्षाकर्मियों ने देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए जान गंवाई. नक्सलियों ने करीब 841 निर्दोष आम नागरिकों की हत्या की. सुरक्षाबलों ने कड़ा जवाब देते हुए अलग-अलग संगठनों के 851 नक्सलियों को मुठभेड़ों में मार गिराया. जिसके बाद अब झारखंड में अब 50 इनामी नक्सली बचे हैं.
झारखंड गठन से अबतक नक्सली हमले में 556 जवान शहीद
– 2000: 03
– 2001: 44
– 2002: 77
– 2003: 19
– 2004: 36
– 2005: 28
– 2006: 48
– 2007: 08
– 2008: 38
– 2009: 71
– 2010: 25
– 2011: 29
– 2012: 25
– 2013: 26
– 2014: 14
– 2015: 05
– 2016: 08
– 2017: 04
– 2018: 10
– 2019: 13
– 2020: 02
– 2021: 06
– 2022: 02
– 2023: 05
– 2024: 03
– 2025: 07
– 2026: (अबतक) 00
– कुल: 556
चाईबासा अति नक्सल प्रभावित श्रेणी से बाहर
झारखंड के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम) से आई है. कभी देश के 12 सबसे खतरनाक नक्सल प्रभावित जिलों में शुमार रहने वाला चाईबासा अब इस सूची से बाहर हो गया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय की नई सूची के अनुसार, चाईबासा को अब केवल ‘डिस्ट्रिक्ट ऑफ कंसर्न’ (सामान्य नक्सल प्रभावित) की श्रेणी में रखा गया है.
सिमटता नक्सलवाद: 22 से 1 जिले तक का सफर
झारखंड में नक्सलियों का भूगोल साल-दर-साल सिकुड़ता गया है, जो सुरक्षाबलों की सफलता को दर्शाता है. 2016 में 22 जिले प्रभावित थे. 2021 यह संख्या घटकर 16 रह गई. 2024 में केवल 11 जिले प्रभावित बचे और 2025 में पांच बचे थे. अब स्थिति यह है कि राज्य में केवल एक जिला ही इस श्रेणी में शेष है.
लीगेसी जिलों में विकास पर जोर
मंत्रालय ने लातेहार, बोकारो और चतरा को ‘लीगेसी जिलों की सूची में डाला है. इसका अर्थ है कि इन क्षेत्रों में नक्सली गतिविधियां लगभग समाप्त हो चुकी हैं, हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था में कोई ढील न आए और विकास की धारा पहुंचती रहे, इसके लिए सरकार यहां एसआरई (Security Related Expenditure) योजना जारी रखेगी.
झारखंड गठन से अबतक सुरक्षाबलों ने 851 नक्सलियों को मार गिराया
– 2000: 11
– 2001: 38
– 2002: 15
– 2003: 44
– 2004: 18
– 2005: 20
– 2006: 34
– 2007: 46
– 2008: 61
– 2009: 61
– 2010: 46
– 2011: 50
– 2012: 29
– 2013: 57
– 2014: 39
– 2015: 37
– 2016: 40
– 2017: 27
– 2018: 25
– 2019: 31
– 2020: 18
– 2021: 08
– 2022: 13
– 2023: 14
– 2024: 11
– 2025: 41
– 2026: (अबतक) 17
– कुल: 851

