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दो साल से थाने में कैद हैं शहीद-ए-आजम भगत सिंह

  रांची: राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में जिस महानायक की प्रतिमा की स्थापना बड़े गर्व के साथ होनी थी, वह सही...

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रांची: राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में जिस महानायक की प्रतिमा की स्थापना बड़े गर्व के साथ होनी थी, वह सही जगह स्थापित नहीं होने के वजह गोंदा थाना परिसर में धूल फांक रही है. विडंबना देखिए कि देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह की प्रतिमा पिछले दो सालों से एक अदद सम्मानजनक स्थान के लिए तरस रही है.

मोरहाबादी मैदान से थाने तक का सफर:

करीब दो साल पहले इस भव्य प्रतिमा को मोराबादी मैदान में स्थापित करने की योजना थी. इसके लिए तैयारियां भी शुरू हुई थीं, लेकिन तकनीकी कारणों और प्रशासनिक आपत्तियों का हवाला देते हुए पुलिस ने प्रतिमा को वहां से हटा दिया. तब से यह मूर्ति गोंदा थाना परिसर के एक कोने में रखी हुई है. प्रशासन ने प्रतिमा हटाई तो थी, लेकिन उसे दोबारा स्थापित करने के लिए आज तक कोई उचित स्थान तय नहीं किया जा सका. साल के 364 दिन इस प्रतिमा की सुध लेने वाला कोई नहीं होता. मूर्ति पर धूल और गंदगी की परतें जमी रहती हैं. प्रतिमा की उचित साफ-सफाई तक की व्यवस्था नहीं की गई है. 23 मार्च यानी शहीद दिवस के मौके पर कुछ संगठन और लोग थाने पहुंचते हैं और प्रतिमा की औपचारिकता के लिए सफाई की जाती है, माल्यार्पण होता है और वीर सपूत को याद किया जाता है,लेकिन जैसे ही यह विशेष दिन बीतता है, भगत सिंह की प्रतिमा फिर से प्रशासनिक उपेक्षा और अंधेरे कोने में गुम हो जाती है.

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