NEWS DESK: दिल्ली हाई कोर्ट ने “लैंड फॉर जॉब” मामले में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को बड़ा झटका दिया है. कोर्ट ने उनकी FIR रद्द करने की मांग खारिज कर दी. जस्टिस रविंदर डुडेजा ने कहा कि याचिका में कोई दम नहीं है.
बिना मंजूरी FIR का तर्क कोर्ट ने नहीं माना
लालू यादव की ओर से दलील दी गई थी कि CBI ने बिना जरूरी मंजूरी के 2022 में FIR दर्ज की, जो कानून के खिलाफ है. उनके वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि मामला उस समय का है जब लालू यादव रेल मंत्री थे, इसलिए पहले सरकार की अनुमति जरूरी थी.
हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 17A बाद में जोड़ी गई है और यह पुराने मामलों पर लागू नहीं होती. इसलिए FIR, जांच और ट्रायल की प्रक्रिया वैध मानी जाएगी.
नौकरी के बदले जमीन का आरोप, लालू यादव ने बताया…
यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब आरोप है कि रेलवे में ग्रुप D की नौकरियों के बदले जमीन ली गई. CBI के मुताबिक, नौकरी के बदले लोगों या उनके रिश्तेदारों से जमीन लेकर उसे यादव परिवार के नाम ट्रांसफर कराया गया.लालू यादव और उनके परिवार ने इन आरोपों से इनकार किया है और इसे राजनीतिक साजिश बताया है.
