रांची/जमशेदपुर: झारखंड पुलिस के अपराध अनुसंधान विभाग Criminal Investigation Department ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है. यह गिरोह झारखंड के युवाओं को विदेश में आकर्षक नौकरी का झांसा देकर थाईलैंड भेजता था और वहां उन्हें बंधक बनाकर साइबर ठगी के धंधे में झोंक देता था. सीआईडी की साइबर सेल टीम ने जमशेदपुर के आजादनगर थाना क्षेत्र से सरताज आलम को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि वह विदेश में बैठे अपने आकाओं के साथ मिलकर स्थानीय युवाओं को सुनहरे भविष्य का सपना दिखाता था और उन्हें साइबर स्लेवरी के जाल में फंसा देता था.

क्या है पूरा मामला.
यह कार्रवाई साइबर क्राइम थाना रांची में दर्ज कांड संख्या 158/25 के आधार पर की गई. जांच में खुलासा हुआ कि युवाओं को बैंकॉक स्थित केके पार्क साइबर स्कैम कंपाउंड भेजा जाता था. विदेश पहुंचते ही युवाओं के पासपोर्ट जब्त कर लिए जाते थे. उन्हें कंपाउंड में कैद कर जेल जैसी परिस्थितियों में रखा जाता था. वहां उन्हें भारत और अन्य देशों के नागरिकों के साथ डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और अन्य ऑनलाइन ठगी करने के लिए मजबूर किया जाता था.
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ऐसे बुना जाता था साजिश का जाल.
साइबर क्राइम विभाग की जांच में गिरोह की कार्यप्रणाली के कई चरण सामने आए. अनधिकृत एजेंट युवाओं से संपर्क कर बैंकॉक, कंबोडिया, लाओस और थाईलैंड में डाटा एंट्री की आकर्षक नौकरी का ऑफर देते थे. वीजा और टिकट के नाम पर उनसे मोटी रकम वसूली जाती थी. विदेश पहुंचने पर नौकरी के बजाय उन्हें साइबर ठगी का प्रशिक्षण दिया जाता था. उनसे फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर फर्जी अकाउंट बनवाए जाते थे. व्हाट्सएप चैट के जरिए फर्जी निवेश ऐप और वेबसाइट के लिंक भेजे जाते थे. लोगों को अधिक मुनाफे का झांसा देकर फर्जी बैंक खातों में पैसे जमा कराए जाते थे. काम करने से इनकार करने पर युवाओं को प्रताड़ित किया जाता था. उन्हें कंपाउंड से बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी. उनके पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज छीन लिए जाते थे.
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अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की आशंका.
प्राथमिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह रैकेट केवल झारखंड तक सीमित नहीं था. इसके तार अन्य राज्यों और विदेशों से भी जुड़े हो सकते हैं. सीआईडी अब इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड और विदेशी कनेक्शन की तलाश में जुटी है. आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं.

