चतरा/रांची: कोल इंडिया की सबसे अधिक मुनाफे वाली परियोजनाओं में शुमार मगध और आम्रपाली ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में अपनी सफलता का परचम लहराया है. विपरीत परिस्थितियों और कानूनी अड़चनों के बावजूद, इन दोनों परियोजनाओं ने मिलकर लगभग 36 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया, जिससे कंपनी की झोली में लगभग 3,000 करोड़ रुपये का मुनाफा आया है.
आम्रपाली परियोजना: कानूनी बाधाओं के बावजूद 1300 करोड़ का लाभ
आम्रपाली परियोजना के लिए पिछला साल चुनौतियों भरा रहा. खनन टेंडर का मामला न्यायालय में चले जाने के कारण परिचालन चार महीने तक प्रभावित रहा.इस बाधा की वजह से परियोजना अपने निर्धारित लक्ष्य से लगभग 8 मिलियन टन पीछे रह गई. आम्रपाली ने 16.50 मिलियन टन कोयला उत्पादन दर्ज किया. कुल उत्पादन के मुकाबले 15 मिलियन टन कोयले का डिस्पैच किया गया. पिछले वित्तीय वर्ष (2024-25) में आम्रपाली ने 24 मिलियन टन उत्पादन कर 2,200 करोड़ का मुनाफा कमाया था, जो इस बार टेंडर विवाद के कारण घटकर 1,300 करोड़ रुपये पर सिमट गया. आम्रपाली और चंद्रगुप्त का संयुक्त लक्ष्य 31 मैट्रिक टन (आम्रपाली: 28 MT, चंद्रगुप्त: 3 MT) था, लेकिन ठेका विवाद ने उत्पादन की गति धीमी कर दी.
मगध परियोजना: 1,700 करोड़ का मुनाफा और शानदार समन्वय
मगध परियोजना ने स्थिरता और कुशल प्रबंधन का उदाहरण पेश किया है. मगध ने इस साल 20 मिलियन टन कोयला उत्पादन का आंकड़ा छुआ. इसमें से 18.84 मिलियन टन कोयले का सफलतापूर्वक डिस्पैच किया गया. इस शानदार प्रदर्शन के दम पर मगध ने लगभग 1,700 करोड़ रुपये का मुनाफा अर्जित किया.
