रांची : नगड़ी सीओ राजेश कुमार म्यूटेशन के लिए मांग रहे थे घूस, डीसी ने जमकर लताड़ा, शो-कॉज जारी

आयुष चौहान Ranchi: रांची उपायुक्त के जनता दरबार में आज नगड़ी सीओ राजेश कुमार के खिलाफ बेहद ही गंभीर आरोप सामने आया....

आयुष चौहान

Ranchi: रांची उपायुक्त के जनता दरबार में आज नगड़ी सीओ राजेश कुमार के खिलाफ बेहद ही गंभीर आरोप सामने आया. सीओ साहब म्यूटेशन के लिए आवेदक से खुली घूस की मांग कर रहे थे. जनता दरबार में प्रार्थी आनंद सिंह और महेश्वर सिंह के मामले में नगड़ी सीओ, सीआई, और कर्मचारी के खिलाफ शो-कोज भी जारी किया गया.

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क्या है पूरा मामला?

दरअसल मामला बालालोंग मौजा खाता संख्या 14 प्लॉट नंबर 470 रकबा 1 एकड़ 5 डिसमिल के म्यूटेशन से जुड़ा है. सबसे पहले सीओ साहब ने केस नंबर 7696/24-25 के म्यूटेशन आवेदन को खारिज कर दिया. वहीं उसके एवज में 30 लाख रुपए घूस की मांग की. आवेदक के द्वारा इस मामले में एलआरडीसी कोर्ट में आवेदन दिया गया. वहीं आवेदन पर सुनवाई करते हुए एलआरडीसी कोर्ट ने आवेदक के पक्ष में म्यूटेशन करने का आदेश दिया. इस दौरान भी सीओ साहब ने अपना रेट घटाकर लगभग 15 लाख रुपए की मांग की. आवेदक ने फिर इस मामले में एडिशनल कलेक्टर के यहां गुहार लगाई. एडिशनल कलेक्टर ने भी म्यूटेशन करने का आदेश दिया. यहां भी सीओ साहब 9 लाख रुपए की मांग कर रहे थे. तंग आकर आवेदक उपायुक्त के जनता दरबार पहुंचे, जहां उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर सीओ को जमकर फटकार लगाई और कहा कि आप जैसे लोगों की वजह से बदनामी होती है. पूरे मामले पर जवाब तलब करते हुए सीओ, सीआई सहित कर्मचारी को शो-कोज जारी किया गया.

सीएनटी-एसपीटी एक्ट की आड़ में मांग रहे थे घूस

दरअसल उक्त जमीन खतियानी राजपूत की है. आनंद सिंह और महेश्वर सिंह के पिता सुगंबर सिंह ने वर्ष 1996 में चामू हज़ाम को जमीन बेच दी थी. वहीं उसी जमीन को वर्ष 2010 में फिर से आनंद सिंह और महेश्वर सिंह ने वापस खरीद लिया, लेकिन जब म्यूटेशन के लिए गए तो सीओ ने आवेदन खारिज करते हुए सीएनटी एसपीटी एक्ट का हवाला दिया.

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वर्ष 2012 में लागू हुई सीएनटी-एसपीटी एक्ट

बता दें कि वर्ष 2012 में झारखंड में सीएनटी-एसपीटी एक्ट लागू किया गया, जिसमें हज़ाम बिरादरी सीएनटी के दायरे में आ गए लेकिन जमीन की डीड 2010 की थी. ऐसे में उस जमीन पर सीएनटी-एसपीटी एक्ट लागू नहीं होता. इसके बावजूद सीओ साहब ने आवेदन खारिज किया. वहीं मामले को लटकाते हुए म्यूटेशन के एवज में घूस की मांग करते रहे. जब मौके पर उपायुक्त ने पूछा कि सीएनटी-एसपीटी एक्ट 2012 में लागू हुई और डीड साल 2010 की है, तो मामला लंबित क्यों है तब सीओ साहब रिव्यू पिटीशन की दुहाई दे रहे थे.

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