सरायकेला-खरसावां: जिले की बहुउद्देशीय परियोजना के तहत बने चांडिल डैम जलाशय इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है. दूरदराज राज्यों से पहुंचे पर्यटकों के बीच चांडिल डैम में नौकायन (बोटिंग) के दौरान एक अनोखा नजारा देखने को मिला. लोगों ने बेहद नजदीक से हाथियों के झुंड को जलक्रीड़ा करते देखा, जिससे वे गदगद हो उठे.


बोटिंग के दौरान दिखा अद्भुत दृश्य
पर्यटकों ने बताया कि बोटिंग करते समय अचानक हाथियों का झुंड जलाशय में उतर आया और पानी में खेलते नजर आया. यह दृश्य इतना आकर्षक था कि लोगों ने इसे अपने कैमरों में कैद कर लिया. कई पर्यटकों का कहना है कि आज के समय दलमा वाइल्डलाइफ सेंचुरी और गज परियोजना क्षेत्र में इतने बड़े झुंड का दिखना दुर्लभ हो गया है.
दलमा सेंचुरी से हो रहा हाथियों का पलायन

करीब 193.22 वर्ग किमी में फैली दलमा सेंचुरी से हाथियों का झुंड पिछले लगभग आठ वर्षों से भोजन और पानी की तलाश में बाहर निकल रहा है. स्थानीय लोगों के अनुसार, ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में हाथियों ने स्थायी रूप से डेरा डाल लिया है.
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ईचागढ़ क्षेत्र बना नया ठिकाना
पर्यटकों और स्थानीय निवासियों का मानना है कि चांडिल डैम के आसपास का क्षेत्र जंगलों से घिरा हुआ है और यहां भोजन व पानी की पर्याप्त उपलब्धता है. यही वजह है कि हाथियों के झुंड यहां रहना पसंद कर रहे हैं. अलग-अलग समूहों में 35, 15 और 9 हाथियों के झुंड देखे गए हैं.
गर्मी में जलक्रीड़ा का समय तय
भीषण गर्मी के दौरान हाथियों का झुंड दोपहर 12 से 2 बजे और शाम 4 से 5 बजे के बीच जंगल से निकलकर डैम जलाशय में पहुंचता है और घंटों पानी में जलक्रीड़ा करता है. यह दृश्य अब पर्यटकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बन चुका है.
पर्यटन बढ़ावा बनाम वन्यजीव संकट
चांडिल वन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस इलाके में एक ओर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों रुपये की योजनाएं चलाई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर वन्यजीवों के पलायन पर सवाल उठ रहे हैं. दलमा ईको-सेंसिटिव जोन और पर्यटन विकास के बीच संतुलन को लेकर वन एवं पर्यावरण विभाग की भूमिका पर भी प्रश्नचिह्न लग रहा है.
बड़ा सवाल
इतने बड़े सेंचुरी क्षेत्र में जहां गजों का प्राकृतिक आवास है, वहां हाथियों की कमी और उनका दूसरे क्षेत्रों में पलायन होना चिंता का विषय बनता जा रहा है.आखिर वन्यजीवों के इस बदलाव पर विभाग अब तक मौन क्यों है?
