विष्णुगढ़ के कुसुम्भा गांव में बदला माहौल, मासूम बच्ची की हत्या के बाद अंधविश्वास के खिलाफ उठी जनक्रांति

Hazaribagh: विष्णुगढ़ प्रखंड अंतर्गत कुसुम्भा गांव में हाल ही में अंधविश्वास के कारण हुई मासूम बच्ची की निर्मम हत्या ने पूरे क्षेत्र...

Hazaribagh: विष्णुगढ़ प्रखंड अंतर्गत कुसुम्भा गांव में हाल ही में अंधविश्वास के कारण हुई मासूम बच्ची की निर्मम हत्या ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है. इस हृदयविदारक घटना के बाद अब गांव में जागरूकता और बदलाव की बयार साफ नजर आने लगी है.

प्रशासन की पहल, शुरू हुआ जनजागरण अभियान

विष्णुगढ़ पुलिस प्रशासन की पहल पर प्रखंड स्तर पर लगातार जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है. इसी क्रम में जेएसएलपीएस की बीपीएम दिव्या सिन्हा के नेतृत्व में कुसुम्भा सखी मंडल द्वारा अंधविश्वास, डायन-बिसाही, जादू-टोना, झाड़-फूंक और बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ एक सशक्त जागरूकता रैली निकाली गई.

रैली में उमड़ा जनसैलाब 

इस रैली में महिलाओं, पुरुषों एवं बालिकाओं की बड़ी भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि अब समाज इन कुरीतियों के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा हो चुका है. आंगनबाड़ी केंद्र कुसुम्भा से शुरू हुई यह रैली गांव के विभिन्न टोलों से गुजरते हुए पुनः वहीं आकर समाप्त हुई.

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नारों से गूंजा पूरा गांव

पूरे रास्ते “अंधविश्वास को छोड़ो”, “वैज्ञानिक सोच अपनाओ”, “डायन प्रथा बंद करो” और “समाज को कुरीतियों से मुक्त करो” जैसे नारों से वातावरण गूंजता रहा.

जागरूकता ही समाधान: दिव्या सिन्हा

बीपीएम दिव्या सिन्हा ने कहा कि इस दर्दनाक घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है, लेकिन अब ग्रामीण जागरूक हो रहे हैं और अंधविश्वास के दुष्परिणामों को समझने लगे हैं. उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सामूहिक प्रयास और सतर्कता बेहद जरूरी है.

अभियान में कई लोगों की अहम भूमिका

इस अभियान को सफल बनाने में मुख्य रूप से सामुदायिक समन्वयक विजय कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही. कार्यक्रम में ऊष्मा देवी, मधु देवी, सोनी देवी, सविता देवी, शांति देवी, अनिता देवी एवं चिंता देवी सहित विष्णुगढ़ थाने की पुलिस और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे.

सामाजिक बदलाव की नई शुरुआत

बता दें कि यह रैली सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि कुसुम्भा गांव में सामाजिक चेतना और परिवर्तन की एक नई शुरुआत का प्रतीक बनकर उभरी है, जिसने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब अंधविश्वास नहीं, बल्कि जागरूकता और शिक्षा ही समाज में एक नई दिशा तय करेगी.

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