Ranchi: राज्य के पांच जिलों में चल रही ग्रामीण पाइप जलापूर्ति परियोजनाओं की जांच में सेंट्रल नोडल ऑफिसर (सीएनओ) की टीम ने कई खामियां पाईं. अधिकारियों ने पाया कि 2338 करोड़ रुपये की लागत वाली पांच परियोजनाओं में न केवल निर्माण संबंधी बड़ी खामियां थीं, बल्कि प्रक्रियात्मक स्तर पर भी गंभीर लापरवाही बरती गई. कोडरमा, पाकुड़, साहिबगंज, पलामू और रांची में चल रही तीन एमवीएस और दो बीडब्ल्यूएस परियोजनाओं का निरीक्षण पिछले साल अगस्त-सितंबर में किया गया था. विशेष रूप से कोडरमा में ओवरहेड टैंक (ओएचटी) के गिरने और पलामू में स्रोत की अनिश्चितता जैसे मुद्दों ने विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. निरीक्षण में पाई खामियों की बात बीते 27 फरवरी को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में अपेक्स कमेटी की बैठक में उठी. अपेक्स कमेटी की सिफारिशों के आधार पर परियोजना की एक अपडेट रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजने की तैयारी है, ताकि अटकी हुई योजनाओं को गति दी जा सके.
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किस जिले में क्या खामियां
-कोडरमा: निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल
जांच रिपोर्ट के अनुसार खराब निर्माण गुणवत्ता के कारण एक ओवरहेड टैंक ढह गया, जिसके बाद काम पूरी तरह से रोक दिया गया. निर्माण और हाइड्रो-टेस्टिंग के मानकों का भी पालन नहीं हुआ. संचालन और रखरखाव की कोई तैयारी नहीं देखी गई. एटीआर में बताया गया है कि परियोजना की भौतिक और वित्तीय प्रगति क्रमश: 20% और 11% है. हालांकि संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर योजना रद्द कर दी. जिम्मेदार इंजीनियरों को भी निलंबित किया गया. परियोजना के लिए रि-टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है.
-पलामू: भूजल अध्ययन की कमी, स्रोत की अपर्याप्त पुष्टि
जांच टीम को भूजल अध्ययन की कमी और स्रोत की अपर्याप्त पुष्टि जैसी खामियां मिली थीं. बिजली कनेक्शन में देरी और ठेकेदार की सुस्त कार्यप्रणाली से परियोजना प्रभावित हुई. एटीआर में बताया गया कि परियोजना की भौतिक और वित्तीय प्रगति क्रमश: 19% और 12% है. लक्षित गांवों को जल आपूर्ति के लिए सोन नदी को पर्याप्त सतही जलस्रोत माना गया है. निर्माण प्रगति पर है. विद्युत विभाग से बिजली का अनुमान लेने की प्रक्रिया चल रही है. कार्य में देरी के लिए ठेकेदार को नोटिस दिया.
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-रांची: स्वीकृत डीपीआर के अनुसार परियोजना का निष्पादन
सेंट्रल नोडल ऑफिसर की टीम ने परियोजना में 59.32 करोड़ की लागत कम करने की संभावना जताई थी. वहीं, एटीआर के मुताबिक, परियोजना की 38% भौतिक और 20% वित्तीय प्रगति है. स्वीकृत डीपीआर के अनुसार परियोजना के कार्य का निष्पादन किया जा रहा है.
-संथाल: गंगा जल निकासी को एनओसी नहीं ली
यह मेगा बीडब्ल्यूएस परियोजना साहिबगंज, पाकुड़ और दुमका की है. जांच में पाया गया कि इसमें भूमि अधिग्रहण और एनओसी से जुड़े मुद्दों के कारण काम पिछड़ रहा है. शुरुआत में गंगा जल निकासी के लिए एनओसी नहीं थी और भूमि अधिग्रहण में 24 महीने से अधिक की देरी हुई थी. बिना हाइड्रो जियोलॉजिकल और जल गुणवत्ता मूल्यांकन के छोड़ी गई खदान का उपयोग किया गया. हाइड्रो टेस्टिंग शुरू नहीं की गई. एक्शन टेकन रिपोर्ट के मुताबिक, गंगा जल निकासी के लिए एनओसी ले ली गई है.
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साहिबगंज-गोड्डा-दुमका: भूमि संबंधी समस्याओं से देरी
साहिबगंज-गोड्डा-दुमका में यह मेगा बीडब्ल्यूएस योजना है. इंटेक फ्लोटिंग जेट्टी और आरसीसी ब्रिज का काम शुरू नहीं हुआ. इनके पूरा होने के बिना इनका चालू होना संभव नहीं है. भूमि संबंधी समस्याओं के कारण जीएसआर परियोजनाओं में देरी हुई है. रेलवे क्रॉसिंग पहले से लंबित है. एटीआर के मुताबिक, सीडीओ द्वारा इंटेक फ्लोटिंग जेट्टी की डिजाइन बीते 13 फरवरी को जमा कर दी गई है. आरसीसी पुल की डिजाइन और ड्राइंग का निरीक्षण आईआईटी चेन्नई किया. सीडीओ कार्यालय ने 26 फरवरी को इसे अनुमोदित कर दिया है. रेलवे क्रॉसिंग के लिए एनओसी मिल गई है.
