भीषण गर्मी में चांडिल डैम से पानी छोड़ने पर बवाल: दो गेट खुलते ही उठे गंभीर सवाल, जांच की मांग तेज

Saraikela-Kharsawan: जिले के चांडिल डैम से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां भीषण गर्मी के बीच अचानक दो रेडियल गेट...

Saraikela-Kharsawan: जिले के चांडिल डैम से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां भीषण गर्मी के बीच अचानक दो रेडियल गेट खोलकर बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्वर्णरेखा बहुद्देशीय परियोजना के तहत बने इस डैम का जलस्तर लगभग 180.20 RL होने के बावजूद शुक्रवार को दो रेडियल गेट करीब 30 सेंटीमीटर तक खोल दिए गए. हैरानी की बात यह है कि क्षेत्र इस समय भीषण गर्मी और संभावित जल संकट से जूझ रहा है, ऐसे में पानी छोड़े जाने के फैसले पर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.

विस्थापितों ने उठाए सवाल, मिलीभगत की आशंका

ईचागढ़ समेत डूब क्षेत्र के विस्थापित परिवारों का आरोप है कि बरसात के समय जब उनका घर पानी में डूब जाता है, तब जलस्तर नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता. वहीं, अभी जब न अत्यधिक वर्षा हो रही है और न ही जलस्तर खतरे के निशान के करीब है, तब पानी छोड़े जाने से संदेह की स्थिति पैदा हो गई है.

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज है कि मानगो स्थित टाटा कंपनी के चेकडैम में जलस्तर घटने के कारण जल आपूर्ति बनाए रखने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया. हालांकि, इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

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अधिकारियों की चुप्पी, जांच की मांग तेज

डैम के एक कर्मचारी ने इस कार्रवाई के पीछे मरम्मत कार्य का हवाला दिया, लेकिन विस्तृत जानकारी देने से परहेज किया. वहीं, संबंधित विभाग के कार्यपालक अभियंता से संपर्क करने के प्रयास भी विफल रहे.

इस पूरे मामले में न तो जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने आई है और न ही विभागीय अधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट की है. ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या जनहित की अनदेखी कर किसी विशेष उद्देश्य से पानी छोड़ा गया है.

विस्थापित परिवारों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. अब देखना होगा कि प्रशासन और राज्य सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है.

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