वेतन संकट से जूझ रहा झारखंड, 2.75 लाख कर्मचारी प्रभावित, सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन के आरोप

Ranchi: झारखंड में वित्तीय कुप्रबंधन को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने हेमंत सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. भाजपा के प्रदेश...

Ranchi: झारखंड में वित्तीय कुप्रबंधन को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने हेमंत सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने प्रदेश मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान राज्य की आर्थिक स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य का राजकोष खाली हो चुका है और सिस्टम पूरी तरह बेहाल है. इसके कारण 26 वर्षों में पहली बार सरकारी कर्मचारियों को महीने के 11वें दिन तक वेतन नहीं मिल पाया है.

लाखों परिवारों पर संकट

प्रतुल शाहदेव ने आंकड़ों के साथ सरकार को घेरते हुए कहा कि राज्य में 2,35,930 नियमित अधिकारी-कर्मचारी और लगभग 45,000 संविदा व आउटसोर्स कर्मी हैं. कुल मिलाकर 2.75 लाख लोग वेतन न मिलने से प्रभावित हैं. इन कर्मियों पर आश्रित लगभग 15 लाख लोगों के सामने बच्चों की फीस, ईएमआई और राशन का संकट खड़ा हो गया है. उन्होंने सवाल किया कि क्या हिमाचल प्रदेश की तरह अब झारखंड सरकार भी वेतन देने के लिए कर्ज लेने की तैयारी कर रही है.

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केंद्र से मिले फंड पर भी सवाल

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि आमतौर पर बजट की स्वीकृति के बाद 5 अप्रैल तक भुगतान हो जाता था, लेकिन इस बार वित्तीय कुप्रबंधन ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. सरकार ने बजट तो बड़ा बनाया, लेकिन उस अनुपात में राजस्व की वसूली नहीं कर पाई.

हजारों करोड़ मिलने के बाद भी खाली खजाना

उन्होंने कहा कि 31 मार्च को केंद्र सरकार ने राज्य को ग्रामीण विकास और पंचायती राज के लिए 2300 करोड़ रुपये और नगर विकास के लिए 392 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे. इसके बावजूद खजाना खाली होना सरकार की कार्यक्षमता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है.

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