News Wave Special: झारखंड के 24 जिलों में पावर का नया समीकरण: कहीं तजुर्बे की परिपक्वता, तो कहीं युवाओं का जोश

  रांची: झारखंड के प्रशासनिक ढांचे में इस समय एक बड़ा दिलचस्प बदलाव नजर आ रहा है. राज्य के 24 जिलों की...

 

रांची: झारखंड के प्रशासनिक ढांचे में इस समय एक बड़ा दिलचस्प बदलाव नजर आ रहा है. राज्य के 24 जिलों की जिम्मेदारी संभाल रहे कप्तानों यानी उपायुक्तों की उम्र के आंकड़ों पर गौर करें तो राज्य सरकार ने जहां एक ओर कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील जिलों की कमान 32 से 35 साल के युवा आईएएस अधिकारियों को सौंपी है, वहीं कुछ जिलों में 50 से 58 साल के अनुभवी अधिकारियों पर भरोसा जताया है. यह यंग गन और ओल्ड गार्ड्स का मिश्रण झारखंड की बदलती प्रशासनिक तस्वीर को बयां कर रहा है.

उम्र का ग्राफ: 32 से 58 के बीच सिमटी सत्ता की धुरी

झारखंड के उपायुक्तों की आयु सीमा पर गौर करें करें तो अधिकतम उम्र 58 वर्ष (राजीव रंजन) है, जबकि न्यूनतम उम्र महज 32 वर्ष (मनीष कुमार, दिलीप प्रताप सिंह शेखावत और संदीप कुमार मीणा) है. यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि राज्य में नीति कार्यान्वयन की धुरी अब काफी हद तक युवा कंधों पर टिकी है.

युवा तुर्कों के हाथ में कमान

झारखंड के 24 जिलों में से आधे से अधिक जिलों में 40 वर्ष से कम उम्र के उपायुक्त तैनात हैं. मनीष कुमार, ऋतुराज, रवि आनंद और नितिश कुमार सिंह जैसे अधिकारी अपनी ऊर्जा और तकनीक के प्रति अपनी रुचि के कारण विकास योजनाओं को डिजिटल बनाने और त्वरित समाधान निकालने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं. 33 वर्षीय उत्कर्ष गुप्ता और 34 वर्षीय हेमंत सती जैसे अधिकारी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले जिलों में नई कार्यशैली पेश कर रहे हैं.

अनुभव का स्तंभ: चुनौतियों का हल

जहां युवा जोश नयापन लाता है, वहीं राजीव रंजन (58), अजय नाथ झा (57) और संदीप कुमार (56) जैसे अधिकारियों का अनुभव शासन के लिए किसी स्तंभ से कम नहीं है. लंबे समय तक झारखंड की प्रशासनिक व्यवस्था को करीब से देखने वाले ये अधिकारी जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सुलझाने में परिपक्वता दिखाते हैं. 56 वर्षीय दिलेश्वर महतो और 51 वर्षीय कंचन सिंह का अनुभव विकास और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण साबित हो रहा है.

क्यों जरूरी है यह कॉम्बिनेशन

प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि किसी भी राज्य के लिए यह मिश्रण आदर्श होता है. युवा अधिकारी जहां अपनी भागदौड़ और नवाचार के लिए जाने जाते हैं, वहीं अनुभवी अधिकारी नीतिगत संकट के समय गाइड की भूमिका निभाते हैं. 47 वर्षीय मंजूनाथ भजंत्री और 45 वर्षीय रामनिवास यादव जैसे अधिकारी इस उम्र के पड़ाव पर हैं जहां उनके पास जोश और अनुभव, दोनों का सही तालमेल है.

किस जिले के डीसी की कितनी है उम्र

  • राजीव रंजन- उम्र-58
  •  अजय नाथ झा- उम्र- 57
  •  संदीप कुमार-उम्र- 56
  •  दिलेश्वर महतो- उम्र- 56
  •  कंचन सिंह- उम्र- 51
  •  मंजूनाथ भजंत्री- उम्र- 47
  • रामनिवास यादव- उम्र- 45
  •  मेधा भारद्वाज- उम्र- 40
  •  आदित्य रंजन- उम्र- 39
  •  दीपक कुमार दूबे- उम्र- 39
  • सौरभ भुवानिया- उम्र- 39
  • आलोक कुमार- उम्र- 36
  • अनन्य मित्तल- उम्र- 36
  • लोकेश मिश्रा- उम्र- 35
  • नितिश कुमार सिंह- उम्र-35
  •  रवि आनंद- उम्र- 35
  •  ऋतुराज- उम्र- 35
  •  शशि प्रकाश सिंह- उम्र- 34
  •  हेमंत सती- उम्र- 34
  • उत्कर्ष गुप्ता- उम्र- 33
  •  अभिजित सिन्हा- उम्र- 33
  •  मनीष कुमार- उम्र- 32
  •  दिलिप प्रताप सिंह शेखावत- उम्र 32
  •  संदीप कुमार मीणा- उम्र- 32

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