Ranchi: जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) में संचालित मध्यस्थता केंद्र ने एक ऐसे वैवाहिक विवाद को सुलझाने में सफलता हासिल की है जिसमें पति-पत्नी एक साल से अलग रह रहे थे. मध्यस्थ अधिवक्ता नीलम शेखर के प्रयासों और सूझबूझ से न केवल एक वैवाहिक जीवन पुनर्स्थापित हुआ बल्कि एक पांच वर्षीय मासूम बच्ची को भी अपने मां-बाप का प्यार अब दुबारा मिलेगा.
लंबा विवाद और कोर्ट केस
दरअसल एक पति-पत्नी के बीच विवाद इस कदर बढ़ गया था कि दोनों पिछले एक वर्ष से अलग रह रहे थे. पत्नी ने पति के विरुद्ध रांची सिविल कोर्ट में कंप्लेन केस दर्ज कराया था. इसके जवाब में पति ने भी बिहार के आरा सिविल कोर्ट में तलाक के लिए अर्जी दे दी थी. इस तकरार के बीच उनकी पांच वर्षीय बेटी अपनी मां के साथ नानी के घर रह रही थी. दोनों पक्षों को आपसी समझौते के लिए रांची सिविल कोर्ट स्थित मध्यस्थता केंद्र भेजा गया था.
समझौते का फैसला
इस पूरी प्रक्रिया में पत्नी की अधिवक्ता अपराजिता मिश्रा और पति के अधिवक्ता प्रकाश रंजन ने सकारात्मक रुख अपनाया. दोनों पक्षों ने मध्यस्थता के दौरान यह महसूस किया गया कि आपसी कलह का सबसे बुरा असर उनकी बेटी के भविष्य पर पड़ रहा है. जिसके बाद वादी और प्रतिवादी दोनों ने स्वेच्छा से अपने पुराने सभी मुकदमों को वापस लेने और गिले-शिकवे भुलाकर एक साथ रहने का फैसला किया.
