Hazaribagh: जिले की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है. यहां बिना मान्यता वाले निजी स्कूलों के संचालन और डबल नामांकन के गंभीर आरोप सामने आए हैं, जिससे पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर प्रश्न खड़े हो गए हैं.जानकारी के अनुसार, जिले में कई ऐसे निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं जिनके पास न तो सरकारी मान्यता है और न ही वैध यू-डाइस कोड. इसके बावजूद ये स्कूल खुलेआम बच्चों को पढ़ा रहे हैं. सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि इन स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों का नामांकन कागजों पर सरकारी विद्यालयों में दर्ज दिखाया जा रहा है.इस व्यवस्था के कारण सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग की आशंका भी बढ़ गई है. पोशाक, छात्रवृत्ति, साइकिल और मध्यान्ह भोजन जैसी योजनाओं का लाभ उन छात्रों के नाम पर लिया जा रहा है, जो वास्तव में सरकारी स्कूलों में उपस्थित नहीं हैं.
नियमों की अनदेखी कर कथित तौर पर दोहरी व्यवस्था का खेल
मामले का एक और गंभीर पहलू यह है कि कुछ छात्र निजी स्कूलों में पढ़ाई करते हुए सरकारी स्कूलों के प्रमाण पत्र के आधार पर नवोदय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश के लिए पात्र बन रहे हैं.जबकि नियमों के अनुसार, ऐसे संस्थानों में प्रवेश के लिए छात्र का नियमित रूप से सरकारी विद्यालय में अध्ययनरत होना अनिवार्य है.शिक्षा विभाग के नियमों के मुताबिक, एक छात्र का नामांकन केवल एक ही विद्यालय में वैध माना जाता है.इसके बावजूद हजारीबाग में नियमों की अनदेखी कर कथित तौर पर दोहरी व्यवस्था का खेल चल रहा है. कुछ स्कूल दूसरे संस्थानों के कोड का उपयोग कर खुद को वैध दिखा रहे हैं, जबकि कई बिना किसी आधिकारिक मान्यता के ही संचालन कर रहे हैं.
शिक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियां
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर चल रहे इस कथित फर्जीवाड़े पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई. क्या यह केवल प्रशासनिक लापरवाही है या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा है, यह जांच का विषय बना हुआ है.
फिलहाल,यह मामला शिक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है. यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो इसका सीधा असर हजारों छात्रों के भविष्य पर पड़ सकता है.
शिक्षा विभाग और प्रशासन के लिए यह स्थिति एक चेतावनी की तरह है कि नियमों के सख्त पालन और पारदर्शी निगरानी के बिना इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लगाना मुश्किल होगा.
