Ghatshila: झारखंड पर्यटन विभाग की पहल पर दार्जिलिंग, सिलीगुड़ी और आसपास के क्षेत्रों के एक्सपोजर विजिट से लौटे 60 प्रतिभागियों ने पर्यटन के आधुनिक और सफल मॉडल का अनुभव साझा किया. इस प्रशिक्षण यात्रा में कोडरमा और पूर्वी सिंहभूम जिलों के प्रतिभागियों ने होमस्टे संचालन, पर्यटन प्रबंधन और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग के बारे में व्यावहारिक जानकारी हासिल की.
दार्जिलिंग का क्लस्टर आधारित होमस्टे मॉडल प्रतिभागियों के लिए खास आकर्षण रहा, जहां चाय बागानों और प्राकृतिक स्थलों के आसपास पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है. इस मॉडल में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और आत्मनिर्भरता ने सभी को प्रेरित किया. झारखंड में भी आदिवासी और इको-टूरिज्म क्षेत्रों में इस मॉडल को अपनाने की संभावना जताई गई है.
इको-फ्रेंडली निर्माण पर जोर
प्रशिक्षण के दौरान पारंपरिक भोजन, लोक संगीत और हस्तशिल्प को पर्यटन से जोड़कर आय बढ़ाने के तरीके सिखाए गए. साथ ही पर्यावरण संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन, जैविक उत्पादों के उपयोग और इको-फ्रेंडली निर्माण पर भी विशेष जोर दिया गया. डिजिटल माध्यमों के उपयोग जैसे सोशल मीडिया और ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म के जरिए पर्यटन के प्रचार-प्रसार की जानकारी भी प्रतिभागियों को दी गई.
इस प्रशिक्षण में माझी रामदास टुडू हैरिटेज विलेज की मनीषा कुदादा, सुरु कालुण्डिया, बबीता हेमब्रम, मालती मुर्मू, लक्ष्मी हांसदा, गीता सोरेन, सुहागी मुर्मू, मुन्नी बिरुली, बालेमय बिरुली, मालती सोरेन सहित घाटशिला अनुमंडल के विभिन्न स्थानों से पिंकी मार्डी, मिठू राउल, कविता पैरा, शांति पातर, सावित्री पातर सहित अन्य महिलाएं शामिल थीं. प्रतिभागियों ने कहा कि यह अनुभव झारखंड में पर्यटन के विकास के लिए नए अवसर पैदा करेगा और राज्य को आत्मनिर्भर व आकर्षक पर्यटन स्थल बनाने में मदद करेगा.
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