भक्ति में डूबा बुंडू: राधारानी मेले में उमड़ा जनसागर, हर गली में गूंजा “राधे-राधे”

Bundu: क्षेत्र की पावन धरती इन दिनों भक्ति, आस्था और परंपरा के रंग में पूरी तरह रंगी हुई है. ऐतिहासिक राधारानी मंदिर...

Bundu: क्षेत्र की पावन धरती इन दिनों भक्ति, आस्था और परंपरा के रंग में पूरी तरह रंगी हुई है. ऐतिहासिक राधारानी मंदिर परिसर में आयोजित वार्षिक मेला इस बार भी श्रद्धा का विराट रूप लेकर सामने आया है. जैसे ही मंदिर के कपाट खुले, “राधे-राधे” के जयकारों से वातावरण गूंज उठा और देखते ही देखते श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा.

अक्षय तृतीया से शुरू हुआ नौ दिवसीय आयोजन
अक्षय तृतीया से शुरू हुआ यह नौ दिवसीय आयोजन केवल एक मेला नहीं, बल्कि सदियों पुरानी आस्था का जीवंत उत्सव बन चुका है. दूर-दराज़ गांवों से लेकर शहरों तक से आए भक्तों ने मंदिर परिसर को मानो एक आध्यात्मिक नगरी में बदल दिया है.खास बात यह रही कि महिलाओं की लंबी कतारें सुबह से देर रात तक पूजा-अर्चना के लिए लगी रहीं, जो इस मेले की बढ़ती लोकप्रियता और गहरी आस्था को दर्शाती हैं.

अखंड संकीर्तन से भक्तिमय माहौल
मंदिर परिसर में चल रहा अखंड संकीर्तन पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना रहा है. ढोल-मंजीरों की थाप और हरिनाम संकीर्तन की मधुर ध्वनि सुनते ही श्रद्धालु खुद को भक्ति में खोते नजर आए.स्थानीय लोगों का मानना है कि इस संकीर्तन में शामिल होने मात्र से मन को अद्भुत शांति और ऊर्जा का अनुभव होता है.

मेले की रौनक: आस्था के साथ मनोरंजन
मेले की रौनक सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है. रंग-बिरंगी दुकानों, झूलों, मीना बाजार और स्वादिष्ट व्यंजनों की खुशबू ने इसे एक सांस्कृतिक उत्सव का रूप दे दिया है.बच्चों के चेहरे पर झूलों की खुशी और बड़ों के चेहरों पर आस्था की चमक—यह दृश्य अपने आप में अद्भुत है.

सदियों पुरानी परंपरा और मान्यता
इस मेले की सबसे खास बात इसकी परंपरा है. मान्यता है कि सदियों पहले यहां राधा-कृष्ण की दिव्य लीला से प्रेरित होकर इस आयोजन की शुरुआत हुई थी.तभी से यह परंपरा निरंतर जारी है और हर वर्ष पहले से अधिक भव्य रूप लेती जा रही है. संकीर्तन के दौरान पूरे क्षेत्र में मांसाहार का त्याग और संयम का पालन इस मेले की पवित्रता को और भी खास बना देता है.

प्रशासनिक व्यवस्था और बढ़ती भीड़
प्रशासन और मेला समिति द्वारा सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए हैं, जिससे श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के दर्शन कर सकें.अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और भी बढ़ेगी.

आस्था, संस्कृति और समाज का संगम
राधारानी मेला सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और समाज को जोड़ने वाला एक अद्भुत संगम है. यहां हर चेहरा भक्ति में लीन है, हर दिल में श्रद्धा की ज्योति जल रही हैऔर यही इस मेले की असली पहचान है.

“जहां आस्था है, वहीं उत्सव है… और जहां राधारानी का मेला है, वहां हर दिन दिवाली है.”

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