हजारीबाग में हाथियों के आतंक पर वन विभाग का बड़ा ऑपरेशन, मानव-हाथी संघर्ष पर स्थायी समाधान की तैयारी

Hazaribagh: जिले में वर्षों से जंगली हाथियों के आतंक, फसलों की बर्बादी और जान-माल के नुकसान से जूझ रहे टाटीझरिया, चुरचू, बड़कागांव...

Hazaribagh: जिले में वर्षों से जंगली हाथियों के आतंक, फसलों की बर्बादी और जान-माल के नुकसान से जूझ रहे टाटीझरिया, चुरचू, बड़कागांव एवं आसपास के इलाकों के लिए राहत की बड़ी खबर है. वन विभाग ने मानव-हाथी संघर्ष को कम करने और बेकाबू हाथियों पर नियंत्रण के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू कर दिया है. इसके तहत जिले के टाटीझरिया में अत्याधुनिक हाथी ट्रांजिट एवं ट्रीटमेंट सेंटर का निर्माण किया जा रहा है, जो क्षेत्र में वन्यजीव प्रबंधन की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा.

घायल और भटके हाथियों का होगा उपचार

वन विभाग की इस पहल का उद्देश्य केवल हिंसक हाथियों को नियंत्रित करना ही नहीं, बल्कि जंगल से भटककर आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचने वाले तथा घायल हाथियों के उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था भी करना है. सेंटर में विशेषज्ञों की निगरानी में हाथियों का इलाज और देखभाल की जाएगी.

सुरक्षा के लिए बनेगा मजबूत ट्रैप और चेकडैम

टाटीझरिया स्थित इरगा के घने जंगलों में बन रहे इस सेंटर के चारों ओर मजबूत ट्रैप तैयार किया जा रहा है, ताकि किसी भी अनियंत्रित हाथी को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित किया जा सके. इसके अलावा परिसर में बड़ा चेकडैम और जलाशय भी बनाया जा रहा है, जिससे हाथियों को पानी और प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके. वन विभाग का दावा है कि यह केंद्र विशेष रूप से जंगली हाथियों के बचाव, उपचार और प्रबंधन के लिए समर्पित रहेगा। यहां विशेषज्ञों की टीम 24 घंटे तैनात रहेगी.

कुंभी हाथी बनेंगे सबसे बड़ा हथियार

इस पूरे अभियान की सबसे बड़ी ताकत होंगे प्रशिक्षित कुंभी हाथी. वन विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, हिंसक या बेकाबू नर हाथियों को नियंत्रित करने के लिए मादा कुंभी हाथियों की मदद ली जाएगी. विशेषज्ञ बताते हैं कि जब कोई नर हाथी उग्र हो जाता है, तब प्रशिक्षित मादा हाथी उसे शांत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. इसके बाद वन विभाग की टीम उसे सुरक्षित तरीके से नियंत्रित कर वापस उसके झुंड से मिला देती है.

मादा कुंभी का ‘हनी ट्रैप’ फॉर्मूला करेगा काम

वन अधिकारियों के मुताबिक, उग्र नर हाथियों को काबू में करने के लिए दुनिया भर में अपनाई जाने वाली वैज्ञानिक तकनीकों में मादा कुंभी हाथियों का उपयोग बेहद प्रभावी माना जाता है. मादा हाथी की मौजूदगी और उसकी गंध से प्रभावित होकर नर हाथी शांत हो जाता है, जिससे उसे पकड़ना और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना आसान हो जाता है.

किसानों और ग्रामीणों को मिलेगी राहत

टाटीझरिया, इरगा और आसपास के क्षेत्रों में हर वर्ष हाथियों के हमलों से किसानों की फसलें नष्ट होती हैं और कई लोगों की जान भी चली जाती है. ग्रामीण लंबे समय से इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग कर रहे थे. वन विभाग का मानना है कि इस सेंटर के शुरू होने के बाद न केवल हाथियों के हमलों में कमी आएगी, बल्कि मानव-हाथी संघर्ष को भी काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा.

वन्यजीव संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम

विशेषज्ञों का कहना है कि यह परियोजना केवल लोगों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि जंगली हाथियों के संरक्षण और उनके बेहतर प्रबंधन की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगी. यदि योजना सफल रही, तो हजारीबाग क्षेत्र में दशकों से चले आ रहे मानव-हाथी संघर्ष की तस्वीर बदल सकती है.

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