Ranchi: देश को साल 2047 तक महाशक्ति बनाने के संकल्प के साथ आज राजधानी दिल्ली में नीति आयोग की 11वीं गवर्निग काउंसिल की बैठक का शंखनाद हुआ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित इस हाई-प्रोफाइल बैठक में बदलते राजनीतिक और प्रशासनिक परिदृश्य की एक नई तस्वीर देखने को मिली. इस बार की बैठक बेहद खास रही क्योंकि इसमें देश के तीन प्रमुख राज्यों के मुख्यमंत्रियों कर्नाटक के डी.के. शिवकुमार, पश्चिम बंगाल के सुवेंदु अधिकारी और तमिलनाडु के विजयने पहली बार शिरकत की.
विपक्षी खेमे से झारखंड के CM हेमंत सोरेन की मौजूदगी ने इस बात को रेखांकित किया कि जब बात राष्ट्र निर्माण की हो, तो संघवाद की भावना राजनीतिक मतभेदों से ऊपर खड़ी होती है. भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों, गवर्नर्स और केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में देश के भविष्य का एजेंडा टेबल पर रखा गया.

एजेंडे पर डिजिटल गवर्नेंस और कौशल विकास
इस बार की बैठक का मुख्य विज़न बेहद स्पष्ट है- आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाना. ‘विकसित भारत @2047 के लिए समावेशी मानव विकास’ की थीम पर केंद्रित इस महामंथन में कई अहम रणनीतियों पर विचार किया जा रहा है.
• समान अवसर और पोषण: हर नागरिक को बिना किसी भेदभाव के आगे बढ़ने के मौके देना.
• रोजगार और कौशल: युवाओं को भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार करना ताकि वैश्विक स्तर पर भारत का डंका बजे.
• डिजिटल गवर्नेंस: सरकारी सेवाओं को पूरी तरह पारदर्शी और आम जनता के लिए सुलभ बनाना.
बैठक का मूल मंत्र
2047 तक देश के हर नागरिक को, चाहे उसका सामाजिक-आर्थिक बैकग्राउंड, लिंग, उम्र या क्षेत्र कुछ भी हो, मुख्यधारा के विकास से जोड़ना है. नीति आयोग की यह बैठक केवल एक सरकारी औपचारिकता नहीं, बल्कि नए भारत की नींव रखने का एक ठोस ब्लूप्रिंट है.
