News Wave Exclusive: झारखंड का ‘कोषागार’ ऑडिट: 2100 करोड़ की निकासी और वित्तीय अनुशासन पर सवाल, राशि निकासी की गति 300 फीसदी तक बढ़ी

रांची: झारखंड के सरकारी खजाने से होने वाली निकासी और विकास कार्यों की गति के बीच का संतुलन पूरा चरमराया हुआ है....

रांची: झारखंड के सरकारी खजाने से होने वाली निकासी और विकास कार्यों की गति के बीच का संतुलन पूरा चरमराया हुआ है.  वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य की विभिन्न ट्रेजरी से निकासी का आंकड़ा 2,111 करोड़ को पार कर गया है. जहां एक ओर सरकार बुनियादी ढांचे पर खर्च का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर निकासी के बेतरतीब पैटर्न और शून्य प्राप्ति  वाले महीनों में भारी खर्च ने वित्तीय प्रबंधन की खामियों को उजागर कर दिया है.

किस ट्रेजरी से कितनी राशि

राज्य की सभी प्रमुख ट्रेजरी के आंकड़ों में  चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. वित्तीय वर्ष 2025-26 पीएल अकाउंट व पब्लिक हेड के तहत कुल निकासी 2,111 करोड़ 28 लाख 45 हजार 670 रुपए दर्ज की गई है.

  • बोकारो ट्रेजरी: सबसे अधिक निकासी, लगभग 653 करोड़ रुपए
  • रांची और प्रोजेक्ट भवन: राजधानी की इन दो ट्रेजरी से सम्मिलित रूप से 412 करोड़ की निकासी.
  • धनबाद और जमशेदपुर: औद्योगिक केंद्रों की इन ट्रेजरी से 285 करोड़ से अधिक की निकासी.
  • देवघर और दुमका: संताल परगना के इन केंद्रों से 195 करोड़ की राशि निकाली गई.
  • चतरा, गुमला, सिमडेगा, साहेबगंज: यहां निकासी का स्तर अपेक्षाकृत कम औसतन 15 से 30 करोड़ रहा.
  • हजारीबाग, देवघर, दुमका और गिरिडीहः यहां  निकासी का औसत 60 से 80 करोड़ के बीच रहा.
  • खूंटी, लोहरदगा, जामताड़ा और सिमडेगाः यहां निकासी का स्तर 15 से 28 करोड़ के बीच सीमित रहा.

सबसे बड़ी निकासी: बोकारो का दबदबा

बोकारो ट्रेजरी निकासी के मामले में पूरे राज्य में शीर्ष पर रही है. विशेषकर अगस्त और फरवरी के महीनों में यहां से असामान्य रूप से बड़ी राशियां निकाली गईं. अकेले अगस्त माह में बोकारो से 65.37 करोड़ की निकासी दर्ज की गई, जो उस माह की राज्य की कुल निकासी का एक बड़ा हिस्सा था.

निकासी की ये रही प्रमुख खामियां 

  • जीरो रिसीप्ट बनाम भारी निकासीः राज्य की अधिकांश ट्रेजरी जैसे चक्रधरपुर, चतरा, गढ़वा में मई से लेकर नवंबर तक शून्य प्राप्ति दर्ज की गई, फिर भी इन महीनों में करोड़ों की निकासी जारी रही. यह दर्शाता है कि खजाना भरने के स्रोत सूख रहे थे, लेकिन खर्च की गति कम नहीं हुई.
  • महीनेवार असंतुलनः आमतौर पर मार्च में मार्च रश देखा जाता है, लेकिन 2025-26 में अगस्त और फरवरी में निकासी का ग्राफ अचानक ऊपर गया. अकेले अगस्त में राज्य भर की ट्रेजरी से 240 करोड़ से अधिक निकाले गए, जबकि उस माह की कुल प्राप्ति निकासी के मुकाबले मात्र 10 फीसदी थी.
  • नेट अमाउंट का ऋणात्मक होना: चक्रधरपुर जैसी ट्रेजरी के आंकड़ों को देखें तो 11 में से 9 महीनों में नेट एमाउंट माइनस में रहा. उदाहरण के लिए, फरवरी में प्राप्ति 0 थी लेकिन निकासी 34.89 लाख रही. 
  • आय शून्य, खर्च करोड़ों में: राज्य की लगभग 18 ट्रेजरी में साल के 7 महीनों (मई से नवंबर) तक प्रप्ति शून्य दर्ज की गई, लेकिन इसी अवधि में निकासी करोड़ों में जारी रही. 
  • निकासी की गति 300 फीसदी तक बढ़ीः वित्तीय वर्ष की समाप्ति (फरवरी-मार्च) के दौरान निकासी की गति सामान्य महीनों की तुलना में 300% तक बढ़ गई. यह प्रशासनिक शिथिलता का प्रतीक है, जहां विभाग फंड लैप्स होने के डर से अंतिम समय में राशि निकालते हैं.
  • नेगेटिव नेट बैलेंस: कई जिलों में ‘नेट अमाउंट’ (प्राप्ति घटाव निकासी) लगातार नेगेटिव बना रहा. इससे ट्रेजरी के नकदी प्रवाह पर दबाव बढ़ा और राज्य के लोक ऋण) की स्थिति प्रभावित हुई.

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ये है फैक्ट फाइल

  • बोकारो और  धनबादः कुल निकासी 938 करोड़, प्राप्ति के मुकाबले 400% अधिक खर्च
  • प्रोजेक्ट भवन, रांचीः कुल निकासी 412 करोड़, वेतन मद में अनियमित निकासी
  • गुमला, सिमडेगा, खूंटीः कुल निकासी 72 करोड़, फंड्स का कम यूटिलाइजेशन
  • दुमका, देवघर, साहेबगंजः कुल निकासी 215 करोड़, अंतिम तिमाही में भारी निकासी
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