Ranchi: झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कैडर रिव्यू कमेटी को तुरंत भंग करने की मांग की है. संघ का कहना है कि यह कमेटी नियमों के खिलाफ बनाई गई है और इससे कर्मचारियों के हित प्रभावित हो रहे हैं. संघ ने सरकार से पुराने प्रस्ताव को मंजूरी देने की भी मांग की है. इस प्रस्ताव में उप सचिव के 41 और संयुक्त सचिव के 24 नए पद बनाने की बात है, जिस पर पहले ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सहमति मिल चुकी है. संघ का कहना है कि अब सिर्फ अंतिम मंजूरी बाकी है, लेकिन फाइल को आगे बढ़ाने के बजाय रोक दिया गया.
यह भी पढ़ें : मुख्यधारा में लौटे पूर्व नक्सलियों संग एसपी की बैठक, बोले- भयमुक्त होकर जिएं जीवन, प्रशासन हर कदम पर आपके साथ
“कार्मिक विभाग के स्तर पर फाइल को जानबूझकर वापस मंगाया गया”
संघ के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि कार्मिक विभाग के स्तर पर फाइल को जानबूझकर वापस मंगाया गया, जो कि पद का दुरुपयोग है. उनका कहना है कि यह फैसला कर्मचारियों के प्रमोशन को रोकने की कोशिश है. इस मुद्दे को लेकर संघ ने 28 अप्रैल को बड़ा विरोध करने का ऐलान किया है. कैबिनेट बैठक के दौरान प्रोजेक्ट भवन में कर्मचारी मानव श्रृंखला बनाकर विरोध जताएंगे. हालांकि, अगर मांगें नहीं मानी गईं तो आगे क्या कदम उठाया जाएगा, इस पर अभी कोई साफ योजना नहीं बताई गई है. संघ का यह भी कहना है कि उनका सेवा नियम केंद्र सरकार के पैटर्न पर तय है, लेकिन राज्य में उसी के अनुसार प्रक्रिया नहीं अपनाई जा रही. बिना सही नियमों के सिर्फ सचिवालय कैडर के लिए अलग से कमेटी बना दी गई, जिसमें इस कैडर के किसी प्रतिनिधि को भी शामिल नहीं किया गया.
यह भी पढ़ें : डिजिटल जनगणना के लिए मास्टर ट्रेनिंग, मोबाइल ऐप से डेटा संग्रहण सिखाया गया
कार्मिक विभाग सचिवालय कर्मचारियों के साथ भेदभाव कर रहा : सचिवालय सेवा संघ
पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि कार्मिक विभाग सचिवालय कर्मचारियों के साथ भेदभाव कर रहा है और प्रमोशन में लगातार बाधा डाली जा रही है. यहां तक कि कोर्ट के आदेश के बाद भी कर्मचारियों को लाभ नहीं दिया गया. संघ के अध्यक्ष रितेश कुमार, महासचिव राजेश कुमार सिंह समेत अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि उन्होंने अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र भी सौंपा है. अब देखना यह है कि सरकार इस पर क्या फैसला लेती है या फिर यह विरोध आगे और बड़ा रूप लेता है.
