Saraikela: चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी में इस वर्ष भी पारंपरिक सेंदरा पर्व मनाया गया. 193.22 वर्ग किमी में फैले गज परियोजना क्षेत्र में सैकड़ों की संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग तीर-धनुष, भाला, फांदा लेकर जंगल की बीहड़ों में पहुंचे और विशु शिकार किया.
2 महीने पहले लाए गए थे 75-86 चीतल..?
गौरतलब है कि करीब दो महीने पूर्व वन एवं पर्यावरण विभाग द्वारा बोकारो के मैथन हिरण पार्क से 75 से 86 चीतल हिरण दलमा सेंचुरी में लाए गए थे. शुरुआत में छोटका बांध के पास तार के नेट में रखने के बाद इन्हें खुले जंगल में छोड़ दिया गया. आजाद होते ही हिरण जंगल की तराई और गांव के आसपास भटकने लगे.
कुत्तों ने खदेड़ा, शिकारी के फंदे में फंसे..?
स्थानीय लोगों के अनुसार, खुले में आए कई हिरणों को जंगली कुत्तों ने खदेड़ा और कुछ का शिकार भी किया. कुछ हिरणों को पकड़कर मकुलाकोचा चेक नाका स्थित हिरण पार्क में रखा गया. आशंका है कि आज सेंदरा पर्व के दौरान छोड़े गए वही चीतल हिरण शिकारी के फंदे या तीर-कमान का शिकार हुए.
वन विभाग का दावा – शिकार नहीं हुआ
दूसरी ओर, RCCF स्मिता पंकज और दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के डीएफओ सवा आलम अंसारी का कहना है, कि इस वर्ष हंटिंग नहीं हो पाई. उनके अनुसार, जागरूकता अभियान के कारण लोग सेंदरा करने नहीं पहुंचे. वन विभाग द्वारा सेंचुरी में जगह-जगह चेक पोस्ट लगाए गए थे और गश्त बढ़ाई गई थी.
जमीनी हकीकत अलग..?
हालांकि, स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है, कि बड़ी संख्या में वीर पारंपरिक हथियारों के साथ जंगल में घुसे और चुपके से शिकार किया. सवाल उठ रहे हैं कि जब 2 महीने पहले ही नए हिरण छोड़े गए थे, तो सेंदरा के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए?
वन्यजीव प्रेमियों ने वन विभाग के दावे पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि अगर शिकार नहीं हुआ तो छोड़े गए हिरणों की वर्तमान संख्या का सत्यापन किया जाए. साथ ही मांग की कि सेंचुरी में CCTV और ड्रोन से निगरानी बढ़ाई जाए. वन विभाग ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है. यदि शिकार की पुष्टि होती है तो वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी.
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