विनीत आभा उपाध्याय
रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने टाटा स्टील लिमिटेड द्वारा दायर उस रिट याचिका को सुनने से इनकार कर दिया है जिसमें कंपनी ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के कथित गलत लाभ उठाने से जुड़े एक जीएसटी अधिनिर्णय (Adjudication Order) को चुनौती दी थी. झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एम. एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की पीठ ने स्पष्ट किया कि कंपनी ने ऐसा कोई असाधारण मामला पेश नहीं किया है जिसके आधार पर वैधानिक अपील प्रक्रिया को दरकिनार किया जा सके.
न्यायिक समीक्षा तक सीमित है अधिकार क्षेत्र
अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि हाईकोर्ट को कर मामलों में अपीलीय मंच में नहीं बदला जा सकता. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस तरह के मामलों में यह न्यायालय अपीलीय क्षेत्राधिकार का प्रयोग नहीं करता बल्कि केवल न्यायिक समीक्षा की अपनी शक्तियों का उपयोग करता है. अदालत का मानना था कि अधिनिर्णय आदेश के तथ्यों की शुद्धता की जांच करने के लिए साक्ष्यों और विवादित तथ्यों का पुनर्मूल्यांकन आवश्यक होगा जो रिट अधिकार क्षेत्र के दायरे से बाहर है.
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CGST अधिनियम की धारा 74 के तहत मामला
यह मामला 26 दिसंबर को CGST अधिनियम की धारा 74 के तहत पारित एक आदेश के बाद हाईकोर्ट में पहुंचा था. यह धारा धोखाधड़ी, जानबूझकर गलत बयान देने या तथ्यों को दबाने जैसे मामलों में लागू होती है. टाटा स्टील का तर्क था कि ये तत्व मामले में मौजूद नहीं थे इसलिए कार्यवाही क्षेत्राधिकार के बिना थी. साथ ही कंपनी ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया था.
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चार सप्ताह में अपील दायर करने की छूट
अदालत ने टाटा स्टील की रिट याचिका को खारिज करते हुए टाटा स्टील को चार सप्ताह के भीतर वैधानिक अपील दायर करने की छूट दी है. अदालत ने आपके आदेश में कहा है कि अगर यदि इस अवधि में अपील दायर की जाती है, तो अपीलीय अधिकारी इसे समय-सीमा के आधार पर खारिज नहीं करेंगे बल्कि गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेंगे.
