चाईबासा: ज़िले का कोल्हान रिजर्व वन क्षेत्र एक बार फिर गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठा है. बुधवार की सुबह 4.30 बजे के करीब टोंटो थाना क्षेत्र के दुर्गम रूटागुटू जंगलों में सुरक्षा बलों और प्रतिबंधित माओवादी संगठन के बीच सीधी मुठभेड़ हुई. इस घटना में एक नक्सली मारा गया है. फिलहाल उसकी पहचान की प्रक्रिया जारी है। घटनास्थल से शव के साथ हथियार और अन्य संदिग्ध सामग्री भी बरामद की गई है, जिन्हें जांच के लिए सुरक्षित किया गया है.
सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच वर्चस्व की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई:
मुठभेड़ ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सारंडा और कोल्हान के घने जंगलों में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच वर्चस्व की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है. रूटागुटू की यह मुठभेड़ इस बात का स्पष्ट संकेत है कि कोल्हान के जंगलों से लाल आतंक का नेटवर्क अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. दुर्गम भौगोलिक स्थिति और माओवादियों की छापामार रणनीति सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. अब देखना यह है, कि सुरक्षा बलों का यह अभियान मिसिर बेसरा जैसे बड़े नेताओं तक पहुंचने में कितना सफल होता है.
सुबह 4:30 बजे शुरू हुआ आमना-सामना:
सुरक्षा बलों को खुफिया जानकारी मिली थी कि माओवादियों का एक दस्ता रूटागुटू के पहाड़ी और घने वन क्षेत्र में छिपा हुआ है. इसके आधार पर कोबरा 209 बटालियन और स्थानीय पुलिस के जवानों ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया. बुधवार सुबह लगभग 4:30 बजे जैसे ही जवान आगे बढ़े, पहले से घात लगाकर बैठे माओवादियों ने उन पर फायरिंग शुरू कर दी. सुरक्षा बलों ने भी मोर्चा संभाला और जवाबी फायरिंग की. देखते ही देखते पूरा इलाका युद्ध क्षेत्र में तब्दील हो गया.
दो दिनों से जारी है सघन कॉम्बिंग ऑपरेशन:
सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा बल पिछले 48 घंटों से गोइलकेरा थाना क्षेत्र के बोरोई और तूनबेड़ा के आसपास सघन सर्च ऑपरेशन चला रहे थे. जवानों की गतिविधियों की भनक माओवादियों को लग चुकी थी, जिसके बाद वे रूटागुटू के जंगलों में मोर्चाबंदी कर जवानों का इंतजार कर रहे थे.
रमेश चांपिया की हत्या और माओवादी सक्रियता:
हाल ही में गोइलकेरा क्षेत्र में पूर्व माओवादी रमेश चांपिया की निर्मम हत्या।ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए थे. इस हत्याकांड के बाद से ही खुफिया इनपुट मिल रहे थे कि कुख्यात माओवादी नेता मिसिर बेसरा का दस्ता इस इलाके में फिर से सक्रिय हो रहा है. खबर है कि माओवादी अब बड़े समूहों के बजाय ‘छापामार रणनीति’ के तहत छोटे-छोटे ग्रुप में बंटकर हमले कर रहे हैं, ताकि सुरक्षा बलों को अधिक नुकसान पहुंचाया जा सके और वे आसानी से जंगलों में ओझल हो सकें.
हाई अलर्ट पर कोल्हान और सारंडा:
मुठभेड़ के बाद पूरे कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है. सुरक्षा बल अब आधुनिक तकनीक का सहारा ले रहे हैं. घने जंगलों के ऊपर ड्रोन से माओवादियों की लोकेशन ट्रेस की जा रही है. मुठभेड़ स्थल की ओर अतिरिक्त फोर्स रवाना कर दी गई है. माओवादियों के भागने के रास्तों को सील कर दिया गया है.
