PAKUR: झारखंड सरकार शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने और बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, इसके तहत स्कूल ऑफ एक्सीलेंस सहित कई बेहतरीन कदम उठाए गए हैं, लेकिन सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी सरकार की कोशिशों पर पानी फेर रही है. हालत यह है कि कई प्राथमिक विद्यालयों में एक ही शिक्षक स्थापित है. ऐसे में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिल पाएगी, यह सहज ही समझा जा सकता है.
एक शिक्षक के भरोसे पठन-पाठन, बच्चों का भविष्य अधर में
पाकुड़ जिले में कई ऐसे प्राथमिक विद्यालय हैं, जहां केवल एक ही शिक्षक के भरोसे बच्चों का पठन-पाठन हो रहा है. शिक्षकों की कमी से पढ़ाई प्रभावित हो रही है और बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। ऐसे कई स्कूल हैं, जहां सिर्फ एक शिक्षक के सहारे ही पूरा शैक्षणिक काम चल रहा है.
पढ़ाई के साथ गैर-शैक्षणिक कार्यों का भी बोझ
इन शिक्षकों पर पढ़ाई के साथ-साथ विभागीय और गैर-शैक्षणिक कार्यों का भी दारोमदार है. शिक्षकों का कहना है कि उन्हें प्रतिदिन का आंकड़ा भेजना, उपस्थिति विवरणी तैयार करना, मिड-डे मील की व्यवस्था देखना और साथ ही पढ़ाई भी करानी पड़ती है, जिससे काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.
छुट्टी लेना भी बना चुनौती
जिन स्कूलों में एक ही शिक्षक हैं, वहां छुट्टी लेना भी आसान नहीं है. छुट्टी लेने से पहले दो दिन पूर्व कार्यालय को सूचना देनी होती है. इसके बाद विभाग आसपास के किसी स्कूल से शिक्षक की प्रतिनियुक्ति करता है, तब जाकर संबंधित शिक्षक को अवकाश मिल पाता है.
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दो-तीन कक्षाओं को मर्ज कर पढ़ाई
शिक्षकों की कमी के कारण कई जगहों पर दो-तीन कक्षाओं को एक साथ मिलाकर पढ़ाया जाता है. इससे छात्रों को विषय समझने में परेशानी होती है और पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित होती है.
जल्द शिक्षक बहाली की जरूरत
ऐसे विद्यालयों में जहां केवल एक शिक्षक हैं, वहां जल्द से जल्द शिक्षकों की बहाली जरूरी है, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके. अब देखने वाली बात होगी कि इन स्कूलों में शिक्षकों की कमी कब तक दूर हो पाती है.
