Hazaribagh : शहर की सफाई और ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर अक्सर नगर निगम अपनी पीठ थपथपाता है, लेकिन इस बार निगम की कार्यशैली खुद उसके अपनों के निशाने पर है. हजारीबाग के महापौर अरविंद कुमार राणा ने जब खुद निगम की सुस्त कार्यप्रणाली और बदहाली पर सवाल खड़े किए, तो प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है.

कोलगट्टी में ‘घर के भीतर’ बह रहा नाला, कुएं भी हुए दूषित
शहर के कोलगट्टी क्षेत्र की स्थिति भयावह है. स्थानीय निवासी तरन्नुम पाकीजा के घर की दास्तां नगर निगम की विफलता का सबसे बड़ा सबूत है. यहाँ नालियां इस कदर जाम हैं कि गंदा पानी सड़कों के बजाय लोगों के कमरों में घुस रहा है. हद तो तब हो गई जब दूषित जल की वजह से घर का कुआं भी पीने योग्य नहीं रहा. यह स्थिति न केवल बदबूदार है, बल्कि महामारी को खुला निमंत्रण दे रही है.
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पॉश इलाकों का भी बुरा हाल: मटवारी में व्यवसाय प्रभावित
निगम की लापरवाही का असर सिर्फ रिहायशी इलाकों तक सीमित नहीं है. शहर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र मटवारी स्थित होटल ए.के. इंटरनेशनल के पास गंदगी और जलजमाव का अंबार लगा है. स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि जलजमाव के कारण ग्राहक आने से कतराते हैं, जिससे उनके व्यापार पर सीधा असर पड़ रहा है.
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महापौर के सवालों ने निगम को घेरा
आमतौर पर विपक्ष सत्ता पर सवाल उठाता है, लेकिन यहाँ महापौर अरविंद कुमार राणा का खुद मोर्चा संभालना यह दर्शाता है कि अधिकारी और कर्मचारी जमीनी हकीकत से मुंह मोड़े बैठे हैं. उनके उठाए सवाल यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि आखिर निगम का भारी-भरकम बजट और योजनाएं जा कहाँ रही हैं?
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