Click Here
Click Here
Click Here

झारखंड हाईकोर्ट का सख्त रुख: बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट पर विस्तृत आदेश, याचिका निष्पादित

रांची: बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के गंभीर मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए विस्तृत आदेश जारी किया है. अदालत ने...

रांची: बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के गंभीर मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए विस्तृत आदेश जारी किया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि अपने विस्तृत निर्देशों के साथ जनहित याचिका को निष्पादित किया जा रहा है, और अब संबंधित सभी संस्थाओं को तय मानकों के तहत कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी.

ह्यूमन राइट्स कनफेडरेशन ने दायर की थी याचिका 

WhatsApp Image 2026-06-13 at 2.57.59 PM (1)

दरअसल, यह जनहित याचिका झारखंड ह्यूमन राइट्स कनफेडरेशन की ओर से दायर की गई थी. याचिका में कहा गया था कि राज्य में बायोमेडिकल कचरे का उचित निस्तारण नहीं होने के कारण स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है. अस्पतालों और नर्सिंग होम से निकलने वाले चिकित्सा अपशिष्ट के अवैज्ञानिक प्रबंधन से संक्रमण और प्रदूषण का खतरा लगातार बढ़ रहा है.

सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य के सबसे बड़े अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) और झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कड़ी फटकार लगाई थी. कोर्ट ने पूछा था कि जब नियम स्पष्ट हैं, तो फिर जमीन पर उनका पालन क्यों नहीं हो रहा है? साथ ही राज्य सरकार से भी जवाब तलब किया गया था.

Also Read: होली और मतगणना को लेकर सिमडेगा पुलिस सतर्क, पुलिस लाइन में मॉक ड्रिल का आयोजन

क्या है आदेश 

इस मामले में 16 फरवरी को सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. अब जारी विस्तृत आदेश में हाईकोर्ट ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं. आदेश में कहा गया है कि राज्य के सभी बड़े अस्पतालों, नर्सिंग होम, क्लीनिकों के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सभी जिलों के उपायुक्त और राज्य सरकार यह सुनिश्चित करें कि चिकित्सा अपशिष्ट का संग्रहण, पृथक्करण, परिवहन और अंतिम निस्तारण निर्धारित मानकों के अनुरूप हो.

अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा गंभीर विषय है. किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद अब राज्य सरकार और संबंधित विभागों की जवाबदेही और बढ़ गई है. सवाल यही है कि क्या अब जमीन पर हालात सुधरेंगे, या फिर आदेश भी फाइलों में सिमट कर रह जाएंगे.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *