Hazaribagh: हजारीबाग शहर के बीचों-बीच स्थित पुराना बस स्टैंड इन दिनों यात्रियों की सुविधा के बजाय जुआरियों के सुरक्षित ठिकाने के रूप में तब्दील हो गया है. हैरानी की बात यह है कि जिला प्रशासन और स्थानीय थाना सब कुछ जानकर भी मूकदर्शक बना हुआ है. आलम यह है कि यहां प्रतिदिन लाखों रुपए का दांव लगाया जा रहा है, जिससे न केवल सामाजिक माहौल खराब हो रहा है, बल्कि अपराध बढ़ने की भी प्रबल आशंका बनी रहती है.
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वर्दी की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि पुराना बस स्टैंड में जुए का खेल किसी गुप्त तरीके से नहीं, बल्कि खुलेआम संचालित हो रहा है. इसके बावजूद वर्दीधारियों की खामोशी कई गंभीर सवाल खड़े करती है. क्या प्रशासन को इसकी भनक नहीं है, या फिर यह सब किसी ‘मौन सहमति’ के तहत चल रहा है?
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