शहादत की राजनीति कर लोकतांत्रिक संस्थाओं को बदनाम करना बंद करे भाजपा: कांग्रेस

Ranchi : झारखंड प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने पश्चिम बंगाल को लेकर भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी के बयान पर...

Ranchi : झारखंड प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने पश्चिम बंगाल को लेकर भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि भाजपा अब जनहित और राजनीतिक मुद्दों पर जवाब देने की स्थिति में नहीं बची है, इसलिए वह खून, शहादत और डर की भावनात्मक राजनीति कर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास कर रही है. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बंगाल की जनता का अपमान करना और हर चुनावी जीत को हिंसा तथा नफरत की कहानी में बदल देना भाजपा की पुरानी रणनीति रही है.

Also Read : पश्चिमी सिंहभूम जिला में डीसी के आदेश से 23 खराब नलकूपों की कराई गई मरम्मत

लोकतांत्रिक जनादेश स्वीकार करने के बजाय षड्यंत्र का नैरेटिव गढ़ती है भाजपा

कांग्रेस ने कहा कि भाजपा को यह बताना चाहिए कि आखिर क्यों हर उस राज्य में, जहां उसे राजनीतिक चुनौती मिलती है, वहां वह लोकतांत्रिक जनादेश स्वीकार करने के बजाय हिंसा और षड्यंत्र का नैरेटिव खड़ा करने लगती है. पार्टी ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता कई बार भाजपा की विभाजनकारी राजनीति को नकार चुकी है और अब हार की हताशा में भाजपा सहानुभूति बटोरने का प्रयास कर रही है. कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं पर केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग, चुनी हुई सरकारों को गिराने और संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने की राजनीति भाजपा लगातार करती रही है.

Also Read : गर्मी को लेकर सरकार सख्त, सभी नगर निकायों को हर हाल में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश

जनता अब भावनात्मक राजनीति नहीं, असली मुद्दों पर जवाब चाहती है

कांग्रेस ने कहा कि लोकतंत्र किसी एक दल की जागीर नहीं है और भाजपा नेताओं को यह याद रखना चाहिए कि राजनीतिक हिंसा, सामाजिक तनाव और संस्थागत हमलों के मामलों में भाजपा शासनकाल भी सवालों के घेरे में रहा है. पार्टी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को लेकर भाजपा का रवैया हमेशा अवसरवादी रहा है. जब परिणाम पक्ष में हों तो संस्थाओं की तारीफ होती है और जब जनादेश खिलाफ हो तो उन्हीं संस्थाओं को कठघरे में खड़ा किया जाता है. कांग्रेस ने कहा कि जनता अब भावनात्मक भाषणों से नहीं, बल्कि महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की बदहाली और सामाजिक सौहार्द जैसे मुद्दों पर जवाब चाहती है.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *