17 बार टूटा, फिर भी अटल रहा आस्था का प्रतीक, जानिए सोमनाथ मंदिर का गौरवशाली इतिहास

News Wave Desk : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सोमवार को सोमनाथ मंदिर के अमृत महोत्सव समारोह में शामिल हुए, यह आयोजन मंदिर परिसर...

News Wave Desk : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सोमवार को सोमनाथ मंदिर के अमृत महोत्सव समारोह में शामिल हुए, यह आयोजन मंदिर परिसर के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया गया, देश के पहले ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रसिद्ध यह मंदिर सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि संघर्ष, पुनर्निर्माण और सनातन संस्कृति की अडिग शक्ति का प्रतीक भी माना जाता है.ये वही ऐतिहासिक सोमनाथ का मंदिर है जिसे 17 बार लूटा गया, तोड़ा गया लेकिन सनातन की ध्वजा हमेशा लहराती रही. आजादी के बाद देश में सबसे पहले जिस मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया गया वो सोमनाथ का ही मंदिर है. ये पहला मंदिर है जिसका उद्घाटन देश के पहले राष्ट्रपति डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद ने किया, आज जब इस पावन ज्योतिर्लिंग में अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है.

इतिहास में सोमनाथ मंदिर पर कई बार हमले हुए, कहा जाता है कि मंदिर को 17 बार लूटा और तोड़ा गया, लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण हुआ.

1026 ईस्वी में महमूद गजनवी ने मंदिर पर हमला कर भारी लूटपाट की
1311 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी के आदेश पर मंदिर ध्वस्त किया गया
1326 ईस्वी में मुहम्मद बिन तुगलक ने हमला किया
1395 ईस्वी में जफर खान ने धावा बोला
1451 ईस्वी में महमूद बेगड़ा ने मंदिर को नुकसान पहुंचाया
17वीं सदी में औरंगजेब ने मंदिर तुड़वाया

इतिहास के इतने हमला के बावजूद मंदिर की आस्था और पहचान हमेशा कायम रही.

अमृत महोत्सव में क्या खास?

अमृत महोत्सव कार्यक्रम के दौरान 51 ब्राह्मणों द्वारा रुद्र पाठ और वैदिक मंत्रोच्चार किया गया, महारुद्र यज्ञ में 1.25 लाख आहुतियां दी गईं. पहली बार मंदिर के 90 मीटर ऊंचे शिखर पर कुंभाभिषेक किया गया, जिसके लिए 11 तीर्थों का पवित्र जल लाया गया, कार्यक्रम में भारतीय वायुसेना के सूर्यकिरण विमानों ने फ्लाईपास्ट कर मंदिर को सलामी दी.

क्या है सोमनाथ मंदिर की मान्यता?

मान्यता है कि यहां चंद्रदेव ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें श्राप से मुक्त किया, यह भी माना जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने अपनी अंतिम लीला इसी क्षेत्र में संपन्न की थी.

प्रचलित कहानी के अनुसार मंदिर का निर्माण चार चरणों में हुआ,

चंद्रदेव ने सोने से, रवि ने चांदी से, भगवान कृष्ण ने लकड़ी से, राजा भीमदेव ने पत्थर से मंदिर बनवाया मंदिर की अद्भुत विशेषताएं देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला ज्योतिर्लिंग मंदिर की ऊंचाई लगभग 155 फीट दो मंजिला भव्य संरचना 10 टन वजनी कलश विशाल ध्वजदंड और स्वर्ण-मंडित कलश कैलाश महामेरु प्रसाद शैली में निर्मित वर्तमान मंदिर.

सोमनाथ मंदिर से जुड़े रहस्य

कहा जाता है कि प्राचीन मंदिर लकड़ी के 56 खंभों पर टिका था, मान्यता है कि मुख्य शिवलिंग बिना किसी सहारे के हवा में स्थित था, मंदिर की छत सोने से जड़ी हुई थी और यहां 40 मन वजनी सोने का घंटा लटका था. इतिहासकारों के अनुसार महमूद गजनवी मंदिर से लगभग 6 टन सोना लूटकर ले गया था.

आजादी के बाद हुआ भव्य पुनर्निर्माण

देश की आजादी के बाद सबसे पहले जिस मंदिर के पुनर्निर्माण का निर्णय लिया गया, वह सोमनाथ मंदिर ही था.

1947 में पुनर्निर्माण कार्य शुरू हुआ
सरदार वल्लभभाई पटेल ने इसकी पहल की
सौराष्ट्र के पूर्व राजा दिग्विजय सिंह ने आधारशिला रखी
8 मई 1950 को पुनर्निर्माण की नींव रखी गई
11 मई 1951 को देश के पहले राष्ट्रपति Dr. Rajendra Prasad ने मंदिर का उद्घाटन किया
आधुनिक मंदिर का निर्माण 1961 में पूरा हुआ
1995 में मंदिर राष्ट्र को समर्पित किया गया
आज सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और पुनर्जागरण का जीवंत प्रतीक माना जाता है.

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