Hazaribagh: ढलते ही हजारीबाग के चौक-चौराहों पर गुपचुप (पानीपुरी) के ठेले के पास लगने वाली भीड़ शहर की पहचान है. खट्टा-तीखा पानी और चटपटे आलू का ज़ायका हर किसी को खींच लाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस स्वाद के आप दीवाने हैं, वह आपकी सेहत के लिए कितना भारी पड़ सकता है?
हाल के दिनों में झारखंड के कई जिलों से आई फूड पॉइजनिंग की खबरों ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है. कई लोग इन चटपटे स्ट्रीट फूड को खाने के बाद अस्पतालों के चक्कर लगाने को मजबूर हुए. इसी को देखते हुए जिला प्रशासन ने अब ज़ायके के शौकीनों की सुरक्षा के लिए कमर कस ली है और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के लिए कड़े फरमान जारी कर दिए हैं.

अब गुपचुप विक्रेताओं को अपनाने होंगे सुरक्षा नियम
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अब केवल स्वाद से काम नहीं चलेगा, सफाई भी उतनी ही जरूरी है. अब आपके पसंदीदा गुपचुप वाले भैया को न केवल हाथ में दस्ताने (ग्लव्स) पहनने होंगे, बल्कि सिर पर कैप और चेहरे पर मास्क भी लगाना अनिवार्य होगा. इतना ही नहीं, जो पानी वे इस्तेमाल कर रहे हैं, वह पूरी तरह से स्वच्छ और सुरक्षित होना चाहिए. बासी आलू या मिलावटी मसालों का खेल अब नहीं चलेगा.
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फूड लाइसेंस के बिना नहीं लगेगा ठेला
प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए सभी स्ट्रीट फूड विक्रेताओं. चाट, फास्ट फूड और ठेला संचालकों. को निर्देश दिया है कि वे अनिवार्य रूप से फूड लाइसेंस प्राप्त करें. साथ ही दुकान के आसपास की सफाई और कचरे का सही निस्तारण भी उनकी जिम्मेदारी होगी. पैक्ड फूड बेचने वालों को अब पैकेट पर लाइसेंस नंबर और निर्माण तिथि साफ-साफ लिखनी होगी.
फलों में कैमिकल मिलावट पर भी प्रशासन की नजर
यह कार्रवाई केवल ठेलों तक सीमित नहीं है. फल विक्रेताओं को भी कड़ी चेतावनी दी गई है. अक्सर फलों को जल्दी पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड जैसे जानलेवा रसायनों का इस्तेमाल होता है, जिसे प्रशासन ने पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है.
नियम तोड़े तो होगी कड़ी कार्रवाई
प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अधिकारियों की टीम कभी भी औचक निरीक्षण कर सकती है. यदि खाने के नमूने फेल हुए या नियमों की अनदेखी मिली, तो खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई और भारी जुर्माना तय है.
